पंजाब की तीन हस्तियों को आज पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें हॉकी कोच बलदेव सिंह, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और संत निरंजन दास शामिल हैं।
जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास जी को पद्मश्री सम्मान मिलना केवल धार्मिक या सामाजिक उपलब्धि नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे पंजाब की राजनीति और सामाजिक समीकरणों में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस सम्मान ने जहां रविदासिया समाज का मनोबल बढ़ाया है, वहीं भाजपा को पंजाब खासकर दोआबा क्षेत्र में दलित वर्ग के बीच नई राजनीतिक पकड़ बनाने का अवसर भी दिया है। इसी वर्ष गुरु रविदास जयंती के अवसर पर पीएम मोदी का डेरा सचखंड बल्लां पहुंचना केवल धार्मिक श्रद्धा तक सीमित नहीं माना गया।
राजनीतिक हलकों में इसे एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा गया कि केंद्र सरकार रविदासिया समाज और डेरा बल्लां के सामाजिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम के जरिये भाजपा पंजाब के दलित वोट बैंक में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करवाने की कोशिश कर रही है। खासकर दोआबा क्षेत्र, जहां अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 45 प्रतिशत है, वहां डेरा बल्लां का प्रभाव बेहद अहम माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पंजाब की करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से संबंधित है, जो देश में सबसे अधिक मानी जाती है। यह चर्चा राजनीतिक रूप से तेज है।