मौसम विभाग की तरफ से जब पहले ही शुक्रवार को बारिश की संभावना जताई गई थी और वीरवार से ही मौसम खराब चल रहा था तो पंजाब सरकार और प्रशासन ने तिरपालों का पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किया। पटियाला की मंडियों का जब शुक्रवार को दौरा किया तो किसानों ने रोते हुए कहा कि सरकार सुनती नहीं और अब मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। पटियाला में शुक्रवार तड़के तेज आंधी-तूफान और बिजली चमकने बाद बारिश हुई। पारा गिरने से लोगों को भले ही गरमी से राहत मिली, लेकिन किसानों की जान आफत में फंस गई। मंडियों में तिरपालों और शेडों की कमी के कारण गेहूं भीग गया। जिस कारण किसान काफी हताश दिखे।
पटियाला की डकाला मंडी में ढेरियों में पड़ी फसल बारिश के पानी से गीली हो गई। किसान टहल सिंह ने बताया कि डकाला मंडी में कोई भी पक्का शेड नहीं है और ऊपर से तिरपालें भी प्रशासन व एजेंसियों द्वारा मुहैया नहीं कराई गईं हैं। इस कारण बारिश से फसल भीग गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को पहले ही पता था कि बारिश होगी तो फिर इंतजाम क्यों नहीं किए गए। अब सूखने के बाद ही फसल बिक सकेगी, तब तक किसानों को मंडियों में ही इंतजार करना पड़ेगा। इसी तरह जिले के बाकी गांवों की मंडियों में भी किसानों को पक्के शेडों व तिरपालों की कमी कारण मौसम की मार झेलनी पड़ी।
पटियाला की नई अनाज मंडी में पाया गया कि मंडी गेहूं से भरी बोरियों से भरी पड़ी थी। गेहूं की तुलाई कर उसे बोरियों में तो भर दिया है, लेकिन अभी तक उठान नहीं हो सका है। इस कारण बारिश में बड़ी संख्या में बोरियां भीग गईं। कई बोरियों को तो तिरपाल से ढका गया था और शेडों नीचे रखा गया था। लेकिन बकाया के लिए कोई प्रबंध नहीं था। आढ़ती कुलदीप सिंह ने बताया कि गेहूं का उठान नहीं हो रहा है, जिस कारण बिकी फसल भीग गई है। खरीद एजेंसियों व प्रशासन की लापरवाही से यह सब हो रहा है। जो बोरियां तिरपालों से ढकी हैं, वह प्रबंध आढ़तियों ने किए हैं।
उधर इस संबंध में डीसी कुमार अमित ने दावा किया कि मंडियों में पर्याप्त संख्या में तिरपालें मुहैया कराई गई हैं, इसलिए खराब मौसम में कोई नुकसान नहीं हो रहा है।