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बम बम भोले के जय घोषों से गूंजा नलास

Thu, 27 Feb 2014 08:45 PM IST
सुदेश तनेजा /अमर उजाला, पटियाला
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शहर के ऐतिहासिक शिव मंदिर नलास में महाशिवरात्रि पर लगे मेले में वीरवार को लाखों लोगों ने माथा टेक आर्शीवाद लिया।
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राजपुरा रोड से करीब पांच मील अंदर को स्थित नलास मंदिर तक जाने वाले रास्ते में लोगों ने हर हर बम बम बोले के जयकारे लगाए।
इस मेले में हर वर्ष देश विदेश से लाखों लोग पहुंचते है। इस बार मेले में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और महिलाओं ने क्लेश परिक्रमा कर शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।

श्रद्धालुओं ने शिवरात्रि की संध्या पर दूध दही और गंगा जल से रुद्राभिषेक किया। मंदिर को रंग बिरंगी रोशनी से सजाया गया और मंदिर के आसपास के  क्षेत्र में लोगों ने लंगर, झूले, सर्कस, दुकानें भी सजाई। मंदिर कमेटी की ओर से सेवा में लगे हुए थे। इस के अलावा पुलिस और सीसीटीवी कै मरों की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। मंदिर कमेटी की ओर से भी 24 घंटे तक लंगर की सेवा और मेडिकल सुविधा सुचारु रूप से चलती रही। इसके लिए एक समय में पचास हजार श्रद्धालुआें के बैठने की भी व्यवस्था की गई।
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 नलास में निवास करते हैं भगवान शिव
राजपुरा से करीब आठ किलोमीटर दूर गांव नलास में करीब 478 वर्ष प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर है। बताया जाता है कि यहां पर स्वयं ही  शिवलिंग प्रगट हुए है। पहले यहां जंगल और कुछ गुजरों के घर थे। उनके पास चराने के लिए गाय होती थी। उसमें से एक कपिला गाय थी। जब गाय जंगल में चारा चरने जाती थी, तो घर वापस आने से पहले झाड़ी के पीछे जाने से उसका दूध अपने आप थनों से बहना शुरू हो जाता था। वह थन खाली होने के बाद ही घर वापस लौटती थी। एक दिन उस कपिला गाय के मालिक गुज्जर ने क्रोध में आकर उस झाड़ी की खुदाई आरंभ कर दी। खुदाई करते समय स्वयं शिवलिंग पर कस्सी के प्रहार से खून की धार बह निकली, जिसे वहां पर उपस्थित सभी लोगों ने देखा। कहा जाता है कि उस समय बड़ के वृक्ष के नीचे स्वामी कर्मगिरी जी तपस्या कर रहे थे, तो उनकी तपस्या भंग हो गई। दूसरी ओर उस समय के महाराजा राज नरेश पटियाला स. कर्म सिंह जी को रात्रि स्वप्न में भगवान शिव जी ने स्वयं दर्शन दिए और कहा कि तेरी रियासत में मेरा अनादर हो रहा है। स्वप्न के अनुसार महाराजा कर्म सिंह ने अपने हाथी को बिना महावत के खुला छोड़ दिया। हाथी ने नलास में उस झाड़ी के पास आकर उसके चारों ओर परिक्रमा की। महाराजा ने गांव नलास के लोगों से उस विषय में जानकारी मांगी। कपिला गाय के दूध की धाराओं को भी स्वयं अपनी आंखों से देखा। महाराजा पटियाला ने शिवजी से क्षमा मांगी और उस स्थान पर सम्वत् 1592 में अपने कर कमलों द्वारा शिव मंदिर बनवाया। महंत कर्म सिंह जी ने शिव मंदिर की पूजा करने के लिए गद्दी संभाल ली। तब से अब तक मौजूदा सातवें महंत इंद्रगिरी जी महाराज इस मंदिर में पूजा करते आ रहे हैं। हर सोमवार, चौदस व अमावस्या को यहां पर जल चढ़ाने वालों का तांता लगा रहता है। आम दिनों में व महाशिवरात्रि पर शिव के दर्शनों के लिए लोग दूर दूर से अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना करने तड़के ही भक्तजन इक्कठे हो जाते है। मंदिर के प्रमुख द्वार के निकट भोले बाबा की पचास फु ट के करीब ऊं ची विशालकाय मूर्ति विराजमान है। कहा जाता है कि शिवमंदिर नलास में मांगी गई हर मुराद पुरी होती है।
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