फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Patiala News: रायकोट का तलवंडी गेट बना सियासी अखाड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
-कांग्रेस–आप एकजुट, लड्डू बांटकर दो घंटे में डलवाया लैंटर -अकाली दल अलग-थलग, स्टे के लिए अदालत की शरण
विज्ञापन

-
संवाद न्यूज एजेंसी
हलवारा। रायकोट का ऐतिहासिक तलवंडी गेट इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। गेट की छत डालने के काम को लेकर उपजे विवाद के बीच वीरवार को कांग्रेस और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के समर्थक एकजुट हो गए। दोनों दलों के समर्थकों ने लड्डू बांटकर खुशी जाहिर की और महज दो घंटे में गेट की छत पर लैंटर डालकर काम पूरा कर दिया। इस दौरान इलाके में तनाव का माहौल बना रहा और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा।
20 जनवरी की देर रात गेट की छत पर लैंटर डालने का काम शुरू होते ही अकाली दल के पूर्व नगर काउंसिल प्रधान अमनदीप सिंह गिल और कांग्रेस के मौजूदा प्रधान सुदर्शन जोशी आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जमकर झड़प हुई थी। हालात बिगड़ते देख भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा था। जिला पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त फोर्स मंगाई गई थी।
विज्ञापन

वीरवार को जब छत डालने का काम दोबारा शुरू हुआ तो स्थिति बिल्कुल अलग थी। अकाली दल के पूर्व प्रधान अमनदीप सिंह गिल मौके पर नजर नहीं आए। वहीं कांग्रेस प्रधान सुदर्शन जोशी भी स्वयं उपस्थित नहीं हुए। इसके बावजूद कांग्रेस और आप समर्थकों ने मिस्त्रियों और मजदूरों की संख्या बढ़ाकर तेजी से काम कराया और दो घंटे में लैंटर डालकर सामान समेट लिया।
बिना प्रस्ताव और टेंडर निर्माण का आरोप
अकाली दल का आरोप है कि गेट की छत के पुनर्निर्माण के लिए न तो नगर काउंसिल में कोई प्रस्ताव पास किया गया और न ही कोई टेंडर जारी हुआ। कांग्रेस प्रधान सुदर्शन जोशी का कहना है कि पिछले चार साल से नगर काउंसिल को कोई ग्रांट नहीं मिली। छत समाजसेवियों के दान से बनवाई जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लैंटर के बाद संदूकी छत को हेरिटेज इमारतों के विशेषज्ञ कारीगरों से तैयार कराया जाएगा। अकाली दल के पूर्व प्रधान अमनदीप सिंह गिल ने प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि जगरांव अदालत में स्टे याचिका पर वीरवार को बहस हो चुकी है और अब फैसले का इंतजार है। उन्होंने पुरातत्व विभाग को रायकोट के चारों ऐतिहासिक गेट संरक्षण में लेने के लिए ईमेल और पत्र भी भेजे हैं। साथ ही मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, डीसी और एसएसपी को शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विज्ञापन

रायकोट की ऐतिहासिक विरासत
1648 में रायकोट की स्थापना नवाब राय अहमद ने की थी। शहर की सुरक्षा के लिए नानकशाही ईंटों और संदूकी छत वाले चार गेट बनवाए गए थे। 1705 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को रायकोट में शरण देने वाले नवाब राय कल्ला इसी वंश से थे। समय के साथ चारों गेट अपनी मूल पहचान खोते जा रहे हैं। विरासत से भावनात्मक जुड़ाव के चलते यह मुद्दा शहरवासियों के लिए संवेदनशील बन चुका है, जबकि राजनीति के चलते विवाद और गहराता जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें