पटियाला से सांसद डा. धर्मवीर गांधी ने पंजाब के पानी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आप की ओर से लिए पंजाब विरोधी स्टैंड को रद्द करते हुए जोरदार ढंग से पंजाब के हक में पैंतरा लिया है।
शनिवार को यहां जारी बयान में डा. गांधी ने कहा है कि केंद्र सरकार ने शुरू से ही पंजाब के साथ अन्याय किया है। राज्य के कुदरती स्रोत पानी को धक्के के साथ बिना कोई मूल्य दिए मुफ्त में पड़ोसी राज्यों राजस्थान, हरियाणा व दिल्ली को देकर पंजाब को आर्थिक पक्ष से कंगाल कर दिया। पंजाब के किसानों को ट्यूबवेलों पर निर्भर बनाकर कर्ज के जाल में फंसा दिया है और उन्हें खुदकुशियां करने के लिए मजबूर किया है। नतीजतन धरती के नीचे का पानी तेजी के साथ कम हो रहा है और करीब आधा पंजाब डार्क जोन में आकर बंजर बनता जा रहा है।
डा. गांधी ने दरियाई पानी के मामले में रिपेरियन सिद्धांतों की वकालत की। उन्होंने कहा कि रिपेरियन हक का मतलब है कि पानी जिस जमीन में से कुदरती तौर पर बहता है, उसका इस्तेमाल करने का अधिकार उस जमीन के मालिकों का है। इस पानी का इस्तेमाल पीने व सिंचाई के लिए किया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि राजस्थान सरकार से केंद्र सरकार पंजाब के पानी का बनता मूल्य दिलाए।
नहीं तो पंजाब में लोगों का गुस्सा भविष्य में भयानक रूप ले सकता है। साथ ही मांग की कि पंजाब रिआर्गेनाइजेशन एक्ट 1966 की धारा 78, 79, 80 को रद्द करके तुंगभद्रा प्रोजेक्ट की तरह भाखड़ा नंगल व ब्यास प्रोजेक्ट्स का बंटवारा केवल रिपेरियन राज्य पंजाब व हिमाचल प्रदेश में किया जाए। इन दरियाओं का कुदरती बहाव हरियाणा में न होने के कारण हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान इन पानियों के हकदार नहीं बनते हैं।