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PU Research: हरिके वेटलैंड के पक्षियों के शरीर में जमा हो रहीं भारी धातुएं, अंडों के छिलके हो रहे पतले

Mon, 03 Aug 2026 08:37 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला

सार

ब्यास और सतलुज नदियों के संगम पर स्थित हरिके वेटलैंड एक अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट है। यह करीब 230 प्रकार के पक्षियों का निवास स्थान है। हालांकि, मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण यहां भारी धातुओं का स्तर बढ़ गया है।
 
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पक्षियों पर प्रदूषण का असर - फोटो : संवाद/फाइल
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विस्तार
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन में हरिके और पौंग वेटलैंड्स के पक्षियों पर प्रदूषण के गंभीर प्रभावों का खुलासा हुआ है। शोध के अनुसार, हरिके वेटलैंड के पक्षियों के शरीर में भारी धातुएं जमा हो रही हैं। इन धातुओं के कारण अंडों के छिलके पतले और कमजोर हो रहे हैं, जिससे भ्रूण की मौत हो जाती है।

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यह तुलनात्मक शोध यूनिवर्सिटी के प्राणी विज्ञान और वातावरण विज्ञान विभाग के शोधकर्ता डॉ. जगदीप सिंह ने डॉ. ओंकार सिंह बड़ैच की देखरेख में किया है। शोधकर्ता डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि ब्यास और सतलुज नदियों के संगम पर स्थित हरिके वेटलैंड एक अंतरराष्ट्रीय रामसर साइट है। यह करीब 230 प्रकार के पक्षियों का निवास स्थान है। हालांकि, मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण यहां भारी धातुओं का स्तर बढ़ गया है।

बुड्ढा नाला और काला संघियां ड्रेन से आने वाला औद्योगिक व शहरी गंदा पानी इसका मुख्य स्रोत है। खेतीबाड़ी में इस्तेमाल होने वाले रसायन भी प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। अध्ययन के लिए पक्षियों के प्राकृतिक रूप से गिरे पंखों और खाली अंडों के छिलकों की जांच की गई। नतीजों से पता चला कि पौंग वेटलैंड की तुलना में हरिके वेटलैंड में पक्षियों के शरीर में लेड, कैडमियम, क्रोमियम, निकल, आयरन, कॉपर, जिंक और मैंगनीज जैसी भारी धातुएं अधिक मात्रा में जमा हो रही हैं।
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प्रदूषण के गंभीर परिणाम
डॉ. ओंकार सिंह बड़ैच ने बताया कि इन भारी धातुओं के जमाव से अंडों के छिलके समय से पहले टूट जाते हैं। इससे भ्रूण की मृत्यु हो जाती है। डॉ. जगदीप सिंह ने कहा, अंडों के छिलके पतले और कमजोर होकर समय से पहले टूट जाते हैं, जिससे भ्रूण की मौत हो जाती है। यह पक्षियों की घटती आबादी का एक बड़ा कारण है। यह स्थिति हरिके वेटलैंड में पक्षियों की आबादी में कमी का एक बड़ा कारण है।

अध्ययन के नतीजों से स्पष्ट है कि हरिके वेटलैंड की मूल्यवान जीव विविधता को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। सीवरेज और औद्योगिक दूषित पानी के उचित ट्रीटमेंट की तुरंत आवश्यकता है। इसके साथ ही, सख्त नियमों को लागू करना और लगातार पर्यावरणीय निगरानी करना भी जरूरी है। ये उपाय प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक होंगे। शोधकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण के जरिये ठोस नीतियों की मांग की है।

शोध पक्षियों की सुरक्षा के लिए अहम 
वाइस-चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने शोधकर्ताओं को उनके कार्य के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह शोध प्राकृतिक सीमाओं और पक्षियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। वाइस-चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने कहा, यह शोध नीति बनाने वालों को पर्यावरण प्रबंधन के लिए ठोस कदम उठाने का रास्ता दिखाता है।

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