बिजली संकट बढ़ा, किसान मजदूर मोर्चा ने किया धरने का एलान
पंजाब में रविवार को बिजली की मांग रिकॉर्ड तोड़ते हुए 16844 मेगावाट दर्ज की गई। यह इस सीजन की अब तक अधिकतम मांग रही। पंजाब में भीषण गर्मी और धान सीजन के कारण मांग में लगातार वृद्धि होने से बिजली संकट गहरा रहा है। किसानों को वादे के विपरीत आठ घंटे की बजाय मात्र चार घंटे की बिजली सप्लाई मिल पा रही है।
किसानों को महंगा डीजल फूंक कर खेतीबाड़ी मोटरों को चलाना पड़ रहा है। इससे खेती लागत बढ़ने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने का खतरा बढ़ गया है। किसानों में रोष है और इस समस्या को देखते हुए अब किसान मजदूर मोर्चा पंजाब चैप्टर मैदान में उतर आया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने ऐलान किया है कि 30 जून को पंजाब भर में पावरकॉम के एक्सईएन, एसई और चीफ इंजीनियरों के प्रमुख दफ्तरों के आगे धरने दिए जाएंगे। इस दौरान पंजाब में विशेष तौर से बीते चार दिनों से बढ़े बिजली संकट का विरोध करते हुए खेतीबाड़ी मोटरों के लिए आठ घंटे बिजली सप्लाई की मांग की जाएगी। साथ ही स्मार्ट मीटरों का विरोध करने के साथ और भी मांगें उठाई जाएंगी। किसान नेता ने कहा कि गांवों में भी अघोषित कट लगाए जा रहे हैं।
पंजाब में बारिश की कमी में लगातार बढ़ती गर्मी व धान सीजन के कारण बीते कई दिनों से बिजली की मांग में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। रविवार को पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए बिजली की मांग 16844 मेगावाट पहुंच गई। 28 जून, 2025 को बिजली की मांग 16818 मेगावाट व 2024 में 15654 मेगावाट दर्ज की गई थी। हालांकि रविवार को लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट का 250 मेगावाट की चार नंबर यूनिट ही बंद रही। बाकी सभी थर्मलों की यूनिटों से बिजली सप्लाई प्राप्त हुई। बावजूद इसके पावरकॉम इस बढ़ी रिकॉर्ड मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है। पावरकॉम को अपने सभी स्रोतों से 5756 मेगावाट बिजली हासिल की, जिसमें प्रमुख तौर से सरकारी क्षेत्र के थर्मलों से 1533 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 982 मेगावाट और प्राइवेट थर्मलों से 2916 मेगावाट मिली।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बिजली की कमी से फसलों को बने संकट को लेकर अब तक न तो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और बिजली मंत्री का कोई बयान आया है। न ही पावरकॉम के सीएमडी बैठक करके इस समस्या का हल कर रहे हैं। ऐसे में किसानों के पास अब संघर्ष करने का अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। इसलिए मंगलवार को पंजाब भर में पावरकॉम अधिकारियों के प्रमुख दफ्तरों के आगे धरने दिए जाएंगे। इस दौरान बिजली सेक्टर के निजीकरण का विरोध और पावरकॉम में रिक्त पड़े पदों पर भर्ती करने की मांगें भी उठाई जाएंगी। साथ ही यूरिया की किल्लत के मुद्दे को भी उठाया जाएगा।