धान खरीदने के लिए सरकार की खरीद एजेंसियां एक अक्टूबर से अनाज मंडियों का रुख करेंगी, लेकिन किसानों की ओर से मंडियों में धान लाने का सिलसिला शुरू हो गया है। किसान औने पौने दाम पर (सरकार द्वारा तय एमएसपी से भी कम) धान बेचने को विवश हो रहे हैं।
कुछ निजी खरीददार ही धान की खरीद कर रहे हैं जिससे किसानों में निराशा है। हालांकि धान की एक अन्य किस्म किसानों को राहत दे रही है। सुनाम की अनाज मंडी में इन दिनों करीब एक हजार क्विंटल धान की आवक शुरू हो गई है। किसानों द्वारा हाईब्रिड किस्म का धान लाया जा रहा है। धान की किस्म 666 के दाम से किसान नाखुश हैं।
उनका धान सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम पर बिक रहा है। सरकार की ओर से सवा पंद्रह सौ रुपये प्रति क्विंटल दाम तय किया गया है जबकि यहां साढ़े चौदह सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से धाम की खरीद हो रही है। किसान गुरमोहन सिंह, नछतर सिंह, भोला सिंह ने कहा कि तय दाम से भी कम दाम पर धान बिक रहा है।
ऐसे में उनके सिर पर कर्ज का बोझ ज्यादा होने के आसार बन गए हैं। हालांकि खेती माहिरों का कहना है कि एमएसपी के कम दाम पर बिक रहा धान असल में सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। उसमें नमी की मात्रा ज्यादा है।
शैलर एसोसिएशन द्वारा पांच अक्टूबर तक हड़ताल करके धान खरीद नहीं करने की घोषणा का असर भी धान खरीद पर पड़ता दिखाई दे रहा है। हरेक वर्ष शैलर मालिक भी बडे़ पैमाने पर धान की प्राइवेट खरीद करते हैं। लेकिन इस बार हड़ताल के कारण अभी तक शैलर मालिकों ने मंडियों का रुख नहीं किया है।
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के जिला अध्यक्ष अमरीक सिंह, महासचिव दरबारा सिंह ने कहा कि सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। हाईब्रिड किस्मों का एमएसपी तय किया जाए और सरकारी खरीद का प्रबंध तुरंत करवाया जाए। यूनियन जल्द ही इस मामले में आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।
धान की 1509 किस्म किसानों को राहत देती दिखाई दे रही है। उक्त किस्म दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है। जबकि पिछले वर्ष यह एमएसपी से भी कम बिक रही थी। किसान माणक सिंह ने कहा कि सरकार का मंडीकरण प्रबंध बेहद कमजोर है। इसी कारण किसानों को उसकी मेहनत का पूरा दाम नहीं मिल रहा है जबकि विचौलिए लाभ कमा जाते हैं।