अमृतसर। दिल्ली की अदालत की ओर से कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को जनकपुरी और विकासपुरी सिख नरसंहार मामलों में बरी करना उन पीड़ित परिवारों के साथ अन्याय है, जो लगभग 41 सालों से न्याय की मांग कर रहे थे। यह बात शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कही। धामी ने बताया कि इस फैसले से पीड़ित परिवारों को गहरा मानसिक सदमा लगा है। उन्होंने कहा कि नवंबर 1984 का सिख नरसंहार देश के इतिहास में एक क्रूर और संगठित घटना के रूप में दर्ज है, जिसमें सरकार के इशारे पर सिखों को निशाना बनाया गया। एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि सज्जन कुमार पहले ही एक मामले में सजा काट रहे हैं, लेकिन इन मामलों में उन्हें बरी कर देना दुखद और निराशाजनक है। यह फैसला केवल पीड़ितों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के न्याय भाव के लिए भी चुनौतीपूर्ण है। संवाद