मंडी गोबिंदगढ़ की रिमट यूनिवर्सिटी में टोटल स्टेशन का इस्तेमाल पर प्रयोग करते हुए छात्र।
- फोटो : अमर उजाला
रिमट यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. हुक्म चंद बंसल ने कहा है कि यूनिवर्सिटी कैंपस में पानी की बड़े पैमाने पर बचत की जा रही है, यूनिवर्सिटी में सभी बगीचे जमीन को सही तरह से एक लेवल पर करने के बाद ही विकसित लिए गए हैं। इसके अलावा माहौल को हर भरा बनाए रखने के लिए बगीचों में जो पानी लगाया जाता है, वह भी सीवरेज का ट्रीटमेंट किया पानी ही होता है।
इससे पहले इसी विषय पर रिमट यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ‘टोटल स्टेशन’ पर कार्यशाला के दौरान उपकुलपति डॉ. एएस चावला ने कहा कि जमीन का स्तर एक बराबर बनाए जाने का फायदा केवल सड़कों इत्यादि के निर्माण में ही लाभप्रद नहीं होता, बल्कि खेतों में इसका महत्व ओर भी बढ़ जाता है।
‘लेजर लैंड लेवलर’ के इस्तेमाल से केवल धान की फसल में ही 50 प्रतिशत से अधिक पानी की बचत हो सकती है। लेजर लैंड लेवलर ‘टोटल स्टेशन’ का ही एक रूप है, जिसका इस्तेमाल खेतों में होता है। उन्होंने कहा कि पानी की बड़े पैमाने पर बचत के अलावा इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और दानों का आकार एक जैसा होता है क्योंकि सभी पौधों को एक समान पानी लगता है।
अनाज की मार्केटिंग के समय कई बार फसल की खरीद पर सरकारी एजेंसियां उत्पाद में नमी की बात कहते हुए उसे रद्द कर देती हैं। अगर फसल को पानी एक समान लगेगा तो वह पकेगी भी एक समान रूप में ही।
धान की बुआई के बारे में उन्होंने कहा कि पहले खेत में पानी छोड़कर कद्दू किया जाता है परंतु अगर लेजर लेवलर के इस्तेमाल के बाद उसमें पानी छोड़ा जाए तो माहिरों के दावों के मुताबिक पानी की लागत महज 25 प्रतिशत ही रह जाती है और बाद में समय समय पर पानी लगाते समय भी 40 से 45 प्रतिशत की बचत होती है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह ऐसे यंत्रों का प्रयोग अधिक से अधिक करें।