पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में आयोजित पंजाब इतिहास कांफ्रेंस मौके पुस्तक रिलीज करते रजिस्ट्रार डा. दविंदर सिंह।
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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के डा. रघुवेंद्र तंवर ने कहा कि बटवारे से संबंधित हुई शोधों में बुकलेट्स, पंफलेट्स, मैगजीन और अखबारों के रूप में पड़े समकालीन लेखों को नजरअंदाज किया गया है।
कश्मीर के मुद्दे को विभिन्न पहलुओं से देखते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग वृत्तांतों में 1947 से 1953 के कश्मीर में राज्य के ज्यादातर लोगों के मन में भारत और पाक से कश्मीर को अलग करने का विचार अस्तित्व में नहीं आया था। इसके विपरीत प्रभावशाली उच्च वर्ग के लोगों ने इस विचारधारा में अपने भविष्य को देखा।
प्रोफेसर तंवर ने कहा कि बटवारे से संबंधित नजरअंदाज किए गए यह स्रोत हमें आम आदमी के उन हालातों संबंधी पनप रही सोच के बारे में स्पष्ट जानकारी प्राप्त करवा सकते हैं। शोधकर्ताओं को इन स्रोतों का इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए डा. तंवर ने कहा कि इससे खोज करने में अनूठी तरह के नतीजों पर पहुंचने में मदद मिलेगी। व
ह पंजाबी यूनिवर्सिटी के पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग की ओर से श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव को समर्पित 49वीं पंजाब इतिहास कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। इसकी प्रधानगी पीयू के रजिस्ट्रार डा. दविंदर सिंह ने की। विभाग की प्रमुख डा. बलविंदरजीत कौर भट्टी ने कांफ्रेंस के विषय के बारे में जानकारी दी।