पंजाब में तीनों थर्मल प्लांटों की 60 फीसदी कोयले की मांग पूरी करने वाली पैनेएम कंपनी की ओर से सप्लाई बंद करने के खिलाफ पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है।
एसोसिएशन ने पंजाब सरकार से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है कि अब तक पावरकाम मैनेजमेंट ने कंपनी के खिलाफ कोई सख्त एक्शन क्यों नहीं लिया है। साथ ही एसोसिएशन ने कंपनी पर तीनों थर्मल प्लांटों को घटिया क्वालिटी का कोयला सप्लाई करके करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने के भी आरोप लगाए हैं। इस मामले में भी जांच करने की मांग की है कि पावरकाम ने सब जानते हुए कार्रवाई क्यों नहीं की।
एसोसिएशन के प्रेसिडेंट इंजीनियर बलदेव सिंह सरां ने कहा कि थर्मल प्लांटों में कोयले के संकट के लिए पैनेएम कंपनी जिम्मेदार है, जिसने 10 अप्रैल से ट्रांसपोर्टेशन के रेट बढ़ाने को लेकर कोयले की सप्लाई बंद कर रखी है।
जिससे तीनों थर्मल प्लांट अपने तय जनरेशन टारगेट पूरे नहीं कर पा रही है और पावरकाम को महंगे दामों पर बाहर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। एसोसिएशन के मुताबिक ट्रांसपोट्रेेशन के रेट बढ़ाने को लेकर कंपनी तभी से झगड़ा कर रही है, जब से उसकी प्लांटों को घटिया क्वालिटी का कोयला सप्लाई करने की चोरी पकड़ी गई है।
आरोप लगाया कि अगस्त 2012 से पहले पैनेएम टेस्टिंग में घपलेबाजी करके अपने कोयले को अच्छी ग्रेडिंग दिलाकर अच्छे रेट ले लेती थी। जब कंपनी की यह गड़बड़ी पकड़ी गई, तो उसे कोयले की क्वालिटी के मुताबिक कम रेट मिलने लगे। इससे कंपनी ने रेटों को लेकर विवाद खड़ा कर लिया। एसोसिएशन के मुताबिक पावरकाम ने कंपनी के कोयले की सही टेस्टिंग कराके अपने 200 करोड़ रुपये बचाए हैं। जो कंपनी को ज्यादा भुगतान के तौर पर जाने वाले थे।
कंपनी की ओर से प्लांटों को कोयले की सप्लाई बंद करने से जो बिजली का गंभीर संकट खड़ा हो रहा है, उसे रोकने के लिए सरकार को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करनी चाहिए। साथ ही मांग की गई कि कंपनी के साथ किया समझौता रद किया जाए।