प्रमुख ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन पीआरटीसी गंभीर आर्थिक संकट में है। जहां देनदारियां 270 करोड़ तक पहुंच गई हैं, वहीं कई प्रयासों के बावजूद आमदनी नहीं बढ़ रही है। इससे कारपोरेशन के लिए अपने रेगुलर मुलाजिमों और पेंशनरों को सैलरी और पेंशन देना तक मुश्किल हो गया है।
पंजाब की लाइफ लाइन माने जाने वाला पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) इस समय गंभीर आर्थिक संकट में है। कारपोरेशन के सिर पर देनदारियां बढ़कर 270 करोड़ तक पहुंच गई हैं। इनमें से 170 करोड़ पेंशनरों और रेगुलर मुलाजिमों के ही बकाया हैं। इसमें सबसे ज्यादा लीव एनकैशमेंट, ग्रेच्युटी, कम्युटेशन पेंशन और ओवरटाइम के हैं। इनके साथ ही कारपोरेशन पर बैंकों और पंजाब सरकार से लिए गए लोन के 100 करोड़ की देनदारी भी है। इन सभी देनदारियों को पीआरटीसी चाह कर भी नहीं उतार पा रहा है, क्योंकि बसों से होने वाली आमदनी बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। टारगेट रोजाना 90 से 95 लाख आमदनी का है, लेकिन असल में आमदनी केवल 65 से 70 लाख रोजाना है।
इस कम आमदनी में कारपोरेशन के लिए अपने खर्चे पूरे करना ही मुश्किल हो रहा है। ज्यादा दिक्कत पेंशनरों को पेंशन और रेगुलर मुलाजिमों को सैलरियां देने में हो रही है। इस समय कॉरपोरेशन के 4000 पेंशनरों की हर महीने की पेंशन सवा पांच करोड़ रुपये बनती है, जबकि 2250 रेगुलर मुलाजिमों की सैलरियां साढ़े 9 करोड़ की बनती हैं। कारपोरेशन के लिए हर माह करीब 15 करोड़ का यह खर्च करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बसों की रिपेयर और अन्य खर्चे पूरा करना बहुत दूर की बात रही, जिससे कारपोरेशन की सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
सरकार से पेंशन के लिए 100 करोड़ की ग्रांट मांगी
इस गंभीर आर्थिक संकट को देखते हुए ही पीआरटीसी ने सरकार को प्रपोजल भेजा है कि खास तौर से पेंशनरों को पेंशन देने के लिए कॉरपोरेशन को 100 करोड़ की ग्रांट दी जाए। चीफ अकाउंट्स आफिसर मोहन लाल ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पेंशन का हर महीने का करोड़ों का खर्च कारपोरेशन उठा नहीं पा रहा है। सरकार को यह खर्च खुद करना चाहिए।
सरकार से फंसे 32 करोड़ मांगे
पीआरटीसी ने पंजाब सरकार से पिछले छह महीनों से फंसे अपने 32 करोड़ अदा करने की भी मांग की है। दरअसल कारपोरेशन की ओर से स्वतंत्रता सेनानियों, पुलिस, मान्यता प्राप्त पत्रकारों, सीनियर सिटीजन, स्टूडेंट्स वगैरह को मुफ्त में या फिर कुछ छूट पर सफर कराया जाता है। इनका भुगतान बाद में सरकार की ओर से किया जाता है। लेकिन पिछले छह महीनों से सरकार की ओर से यह पैसा कारपोरेशन को नहीं दिया जा रहा है। अब कॉरपोरेशन ने सरकार को पत्र लिखकर अपना यह पैसा भी वापस मांगा है।