पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में लगे पोस्टर।
- फोटो : अमर उजाला
पंजाबी यूनिवर्सिटी कैंपस में बुधवार को पहुंची पुलिस ने पंजाब स्टूडेंट यूनियन (ललकार) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन के छात्र नेताओं से पूछताछ की।
आरोप है कि इन संगठनों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में कश्मीर मांगें आजादी लिखे पोस्टर लगाए हैं। पूछताछ के बाद पुलिस व यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार दविंदर सिंह ने विद्यार्थियों की ओर से लगाए पोस्टरों में भारत विरोधी कोई बात न होने का कहा है। वहीं आज बाद दोपहर यूनिवर्सिटी कैंपस का उस समय माहौल गर्मा गया, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्यों ने यूनिवर्सिटी में पहुंचकर उक्त जत्थेबंदियों की ओर से लगाए पोस्टर फाड़ दिए।
एक हिंदी अखबार में बुधवार को एक खबर प्रकाशित हुई है। इसके मुताबिक पंजाब स्टूडेंट यूनियन (ललकार) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन ने पंजाबी यूनिवर्सिटी कैंपस में भारत विरोधी पोस्टर लगाए हैं। इसमें कश्मीर मांगे आजादी लिखा गया है। इस खबर के छपते ही संबंधित अर्बन अस्टेट थाने की पुलिस पूछताछ के लिए पीयू पहुंची। थाना इंचार्ज पुनीत ने कहा कि पोस्टरों में भारत विरोधी जैसी कोई बात नहीं है।
स्टूडेंट्स ने कश्मीर को अत्याचार से मुक्ति दिलाने की बात पोस्टरों में कही है, न कि भारत सरकार से। पीयू के रजिस्ट्रार दविंदर सिंह ने कहा कि छात्र जत्थेबंदियों को बातचीत के लिए बुलाया गया था। जत्थेबंदियों ने कहा कि उनकी बात को तोड़-मरोड कर पेश किया गया है।
इसी दौरान बाद दोपहर एबीवीपी के कुछ नुमाइंदे पीयू पहुंचे और उन्होंने पोस्टर फाड़ दिए जिसका स्टूडेंट यूनियनों ने विरोध किया।
पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन (ललकार) और डीएसओ ने हिंदी अखबार की ओर से छापी खबर को पीली पत्रकारिता का नमूना करार दिया है। यहां जारी प्रेस बयान में यूनियन के गुरप्रीत सिंह और डीएसओ के अजैब सिंह ने कहा है कि जत्थेबंदियों ने कश्मीर में आम लोगों पर हो रहे अत्याचार का विरोध किया है। जत्थेबंदियां भारत के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत सरकार की गलत नीतियों के विरोध में हैं। हिंदी अखबार की ओर से जत्थेबंदियों पर लगाए आरोप गलत हैं।