फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंक ने लगाया ‘सॉरी नो कैश’ का बोर्ड, भड़के लोगों ने की नारेबाजी

Sun, 04 Dec 2016 03:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, मंडी गोबिंदगढ़
विज्ञापन
मंडी गोबिंदगढ़ में एसबीओपी बैंक के बाहर वेतन और पेंशन ना मिलने पर नारेबाजी करते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नोटबंदी के बाद से लोग कैश न मिलने से लोग परेशान हैं। स्टेट बैंक ऑफ पटियाला ने बाद दोपहर कैश न होने पर गेट पर सॉरी नो कैश लिखकर लगा दिया। इस पर सुबह नौ बजे से लाइन में लगे वेतनभोगियों और पेंशनर भड़क गए। लोगों ने कहा कि बैंक ने शनिवार सुबह ही उन्हें कैश के लिए टोकन दिए थे, लेकिन शाम तीन बजे तक कैश न मिलने पर करीब 30 वेतन भोगियों ने बैंक के बाहर नारेबाजी कर दी। सभी ने बैंक प्रबंधक को एक पत्र में सभी के खाता नंबर लिखकर जवाब मांगा। 
विज्ञापन


इस मौके पर पावरकॉम कर्मी अमरीक सिंह, बलजिंदर सिंह, गुरचरन सिंह, बलदेव सिंह, रजिंदर सिंह, नैब सिंह, हरनेक सिंह, कुलदीप सिंह, गुरचरन सिंह, सुरूप राम और करनैल सिंह समेत अन्य कर्मियों ने बताया कि तीन तारीख हो गई है। एक कर्मी ने बताया कि घर पर एक सदस्य बीमार है और बैंक में हमारा पड़ा पैसा ही हमें नहीं मिल पा रहा। किसी से पैसे मांगते भी हैं तो कैश की कमी से हर कोई मदद करने में असमर्थ है। 

स्टेट बैंक ऑफ पटियाला के सहायक प्रमुख प्रबंधक कैलाश चंद्रा ने बताया कि शुक्रवार को हमारे पास जितना भी कैश था, हमने वह अपने ग्राहकों को बांट दिया। चेस्ट शाखा में पीछे से ही कैश नहीं आ रहा तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं। सैलरी-डे होने के चलते आम लोगों के साथ वेतन और पेंशन लेने वालों की भीड़ ज्यादा हो गई है फिर भी हम सभी को बराबर कैश बांट रहे हैं। जिसे नहीं मिल रहा, उसे टोकन दे रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसी को ज्यादा चाहिए तो उसे ज्यादा दे दिया। सोमवार को कैश आएगा तो हम वेतनभोगियों और पेंशनर को पहल के आधार पर पैसे देंगे। 
विज्ञापन


पंजाब भर में ज्यादा शाखाओं वाले बैंकों में कैश की कमी लोगों के लिए सबसे बड़ा संकट बनता जा रहा है और कम शाखाओं वाले बैंकों में कैश को लेकर थोड़ी राहत जरूर है।  एसबीओपी प्रबंधक कैलाश चंद्रा ने कहा कि स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की पंजाब भर में करीब 650 के शाखाएं हैं। जबकि कुछ बैंकों की शाखाएं 50 ही हैं। मान लीजिए आरबीआई 10 बैंकों को 10-10 करोड़ देता है तो ऐसे में 650 शाखाओं वाले बैंक क्या करेंगे। वहीं 50 शाखाओं वाले बैंकों में तो कैश की समस्या ही खत्म हो गई। 
विज्ञापन



 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें