जनवरी 2015 में जिला सेहत विभाग द्वारा जिले के तीन सरकारी स्कूलों, एक अस्पताल और एक ढाबे से लिए गए पानी के 15 सैंपल खराब पाए गए हैं। जिलाधीश कमलदीप सिंह संघा ने संबंधित विभाग की बैठक बुलाकर तीन स्कूलों में बच्चों के टंकियों से पानी पीने पर रोक लगा दी है। रोक तब तक रहेगी, जब तक इनकी सही रिपोर्ट नहीं आ जाती।
फतेहगढ़ साहिब में जनवरी में सेहत विभाग ने पूरे जिले से संभावित क्षेत्रों से पानी के 81 सैंपल भरे थे। इनमें से 59 सैंपलों की रिपोर्ट आई है जिसमें से 15 सैंपल फेल हो गए हैं। इनमें से ज्यादातर सैंपल सरकारी मिडल स्कूलों के हैं और एक सैंपल ढाबे का है।
पानी के सैंपल फेल होने वाली लिस्ट में सरकारी मिडल स्कूल थाबलां, घटींड और धूंदा के नाम शामिल हैं। एलीमेंटरी स्कूलों में कलाल माजरा, घटींड और सरदार ढाबे का नाम भी शामिल है।
इसके अलावा 2014 में भी सेहत विभाग ने नगर काउंसिल सहित आसपास इलाकों से पानी के 27 सैंपल भरे थे, जिनमें से 18 पास और 9 सैंपल फेल हुए थे। इसी तरह गांवों और सरकारी टंकियों से लिए 21 सैंपलों से 13 ही पास हो पाए जबकि 8 फेल हो गए थे।
सरकारी स्कूलों से भरे 40 सैंपल में से 26 पास और 14 फेल हुए थे। प्राइवेट स्कूलों के 9 सैंपलों में से 6 पास और 3 फेल, घरों से लिए 96 सैंपल में 71 पास और 25 फेल पाए गए। सरकारी दफ्तरों से भरे 24 सैंपल में से 19 पास और 5 फेल हुए।
शुद्ध पानी मुहैया करवाना विभाग का नैतिक कर्तव्य है। जिन स्कूलों के पानी के सैंपल फेल हुए हैं उन स्कूलों में पानी पीने की सख्त मनाही की गई है। जहां कहीं भी पानी की रिपोर्ट ठीक नहीं पाई जा रही वहां विभाग के पास सारा आंकड़े हैं और इन पर काम भी किया जा रहा है।
बलजीत सिंह, सिविल सर्जन
मंडी गोबिंदगढ़ के पूर्व नगर काउंसिल अध्यक्ष और मौजूदा पार्षद जगमीत सिंह सहोता ने बताया कि मंडी का पानी भी पीने योग्य नहीं है। यहां के सैंपल भी कभी पास नहीं हुए। इसका कारण है, जिन पाइपों से पानी लोगों के घरों में पहुंचता है, वे 20-22 साल पुरानी हैं।
ट्यूबवेल से निकला साफ पानी लोगों के घरों तक पहुंचते-पहुंचते दूषित हो रहा है और ज्यादातर पाइप जगह-जगह से लीक हो रही हैं।