बातचीत का प्रयास नहीं किया
किसान नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन अहिंसा के सिद्धांतों पर चल रहा है। डल्लेवाल का हमेशा ये मानना रहा है कि वह संगठन के मुखिया हैं और उम्र में बड़े भी हैं। इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि किसी नौजवान को कोई नुकसान न हो, यदि कोई नुकसान हो तो उनका बेशक हो जाए। किसानों की ओर से पिछले 34 दिनों में उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जजों को पत्र लिखे गए हैं लेकिन किसी ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया और न ही उनसे बातचीत का कोई प्रयास किया है।
सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र को नहीं दे रहा निर्देश
किसान नेताओं ने कहा कि खेती के विषयों पर संसद की स्थायी कमेटी की रिपोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट में एमएसपी गारंटी कानून बनाने के पक्ष में सिफारिश की गई, लेकिन केंद्र इन्हें भी मानने को तैयार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी केंद्र को इस विषय में कोई दिशा-निर्देश नहीं दे रहा है।
डल्लेवाल की सुरक्षा के लिए जान देने को तैयार
किसान नेताओं ने कहा कि डल्लेवाल की सुरक्षा के लिए वह सब अपनी जान देने को तैयार हैं। अगर सरकार ने डल्लेवाल को जबरन उठाने की कार्रवाई की, तो मोर्चे पर जान-माल का जो भी नुकसान होगा, उसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार एवं उन संवैधानिक संस्थाओं की होगी जो इस तरीके से आदेश पारित करने का प्रयास कर रही हैं।
किसानों की मुख्य मांगें
- एमएसपी की कानूनी गारंटी
- किसानों और कृषि मजदूरों के लिए कर्ज माफी और पेंशन
- बिजली दरों में वृद्धि पर रोक
- पुलिस मामलों की वापसी
- लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय