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साइकिल यात्रा से दे रहे नशे के खिलाफ संदेश

Sat, 26 Mar 2016 10:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
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पटियाला में साइकिल यात्री अमनदीप सिंह खालसा का सम्मान करते गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब के प्रबंधक। - फोटो : amarujala
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कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और मन में कुछ ठान लिया जाए, तो फिर मंजिल दूर नहीं रहती हैं। यह बात मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले महादेव रेड्डी पर खरी उतरती है, जो अब अमनदीप सिंह खालसा बन चुके हैं। साल 2008 से लगातार साइकिल पर यात्रा करके जहां नौजवानों को नशों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं, वहीं पूरे देश में सिखी का प्रचार भी कर रहे हैं। अमनदीप सिंह शनिवार को पटियाला पहुंचे और यहां ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री दुखनिवारण साहिब में माथा टेका। गुरुद्वारा प्रबंधकों की ओर से उनका सम्मान किया गया।
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कंधे पर लटके झोले में लैपटॉप व साइकिल पर जीपीएस व आधुनिक सोशल नेटवर्क साइट्स के साथ जुड़े अमनदीप सिंह खालसा पंजाबी के अध्यापक हैं। उनकी पत्नी भी कर्नाटक के गुरुद्वारे में चल रहे स्कूल की शिक्षिका हैं, जबकि उनका बेटा कर्नाटक में एमबीबीएस की डिग्री करने के बाद वर्तमान में न्यूयार्क में ईएनटी विशेषज्ञ डाक्टर है। खालसा ने अपनी सवा दो लाख किलोमीटर की भारत भर की यात्रा पूरी कर ली है और अब वह दो महीनों तक अमेरिका जाएंगे। उनको ट्विटर पर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा वेलकम टू अमेरिका कह चुके हैं। खालसा ने गिनीज बुक आफ रिकार्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया है। छह भाषाओं के जानकार अमनदीप सिंह का कहना है कि वह जब साइकिल पर घर से चले थे, तब उसके खाते में एक लाख रुपये थे। इस दौरान उन्होंने सात साइकिल, 37 टायर, 20 ट्यूबों पर एक लाख रुपया खर्च कर दिया।

अमनदीप सिंह खालसा ने कहा कि वह मांग कर नहीं खाते हैं और अपने साइकिल पर खाने-पीने का सारा सामान लेकर चलते हैं क्योंकि मांगना सिखी का असूल नहीं है। वह नशों के खिलाफ जागरूकता व सिखी के प्रचार-प्रसार के लिए स्कूलों व कालेजों में जाकर भाषण करते हैं और इस समय अपनी साइकिल यात्रा पर एक पुस्तक भी लिख रहे हैं। अमनदीप ने पूरे देश का भ्रमण किया व छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने उनको 120 किलोमीटर जंगल पार कराया व 500 रुपये भेंट के तौर पर दिए। उन्होंने कहा कि पंजाब में जितने शराब के ठेके हैं, उतने स्कूल नहीं हैं।
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