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वीडियो का चस्का, नींद का झटका: मनोरंजन बन रहा परेशानी, युवाओं की नींद और मन दोनों बेहाल; रिसर्च कहती है

Mon, 12 Oct 2026 08:00 AM IST
Nivedita रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला

सार

शोध के अनुसार लगातार वीडियो देखने की आदत यानी बिंज वॉचिंग कुछ समय के लिए खुशी और मनोरंजन दे सकती है, लेकिन जब यह अत्यधिक और अनियंत्रित हो जाती है तो नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकती है। इसका संबंध मानसिक तंदुरुस्ती में कमी से भी सामने आया है।
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रील का चस्का - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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डिजिटल दौर में लगातार वीडियो देखने की आदत युवाओं की नींद और मानसिक सेहत को प्रभावित कर रही है। मनोरंजन के लिए शुरू होने वाली यह आदत कई बार बेकाबू होकर सोने की दिनचर्या बिगाड़ देती है। 
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग में हुए एक शोध में सामने आया है कि लगातार वीडियो देखने की आदत के कई पहलू खराब नींद और कम मानसिक तंदुरुस्ती से सीधे जुड़े हैं। अध्ययन में बिस्तर पर लेटे-लेटे ऑनलाइन सामग्री देखते रहना, सोने में देरी करना और अपने व्यवहार पर नियंत्रण की कमी को प्रमुख कारकों के रूप में रेखांकित किया गया है।

यह शोध मनोविज्ञान विभाग की शोधार्थी डॉ. अमृत कौर हांस ने प्रो. हरप्रीत कौर के मार्गदर्शन में किया। पंजाब के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 18 से 25 वर्ष की आयु के युवाओं को अध्ययन में शामिल किया गया। शुरुआती स्तर पर 1170 प्रतिभागियों में से निर्धारित मानदंडों पर खरे उतरने वाले 668 युवाओं को मुख्य विश्लेषण का आधार बनाया गया। शोध के अनुसार लगातार वीडियो देखने की आदत यानी बिंज वॉचिंग कुछ समय के लिए खुशी और मनोरंजन दे सकती है, लेकिन जब यह अत्यधिक और अनियंत्रित हो जाती है तो नींद के पैटर्न को बिगाड़ सकती है। इसका संबंध मानसिक तंदुरुस्ती में कमी से भी सामने आया है।
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बिस्तर पर वीडियो देखना और सोने में देरी बड़ी वजह
शोध में सामने आया कि बिस्तर पर लेटकर ऑनलाइन वीडियो देखते रहना और समय पर सोने के लिए खुद को नियंत्रित न कर पाना युवाओं की तंदुरुस्ती में कमी से जुड़े प्रमुख कारक हैं। समस्या तब और गंभीर हो सकती है, जब युवाओं को अपनी डिजिटल आदतों और उनके व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव का अहसास नहीं होता। मनोविज्ञान में अपने विचारों और व्यवहार के प्रति सजग रहने की इस क्षमता को माइंडफुलनेस कहा जाता है। अध्ययन में अलगाव की भावना को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। जब युवा वास्तविक मानवीय संपर्क की जगह वर्चुअल दुनिया में रिश्ते और जुड़ाव तलाशने लगते हैं, तो इसका असर उनकी मानसिक तंदुरुस्ती पर पड़ सकता है।

स्वस्थ डिजिटल आदतें अपनाने पर जोर
शोध की निगरानी करने वाली प्रो. हरप्रीत कौर के अनुसार युवाओं को डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखने, सोने का नियमित समय तय करने और सामाजिक संपर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। इससे डिजिटल युग में उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। पंजाबी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने शोधार्थी डॉ. अमृत कौर हांस और मार्गदर्शक प्रो. हरप्रीत कौर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में मीडिया के अनावश्यक इस्तेमाल और उससे जुड़े मनो-सामाजिक कारकों का युवाओं की सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
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