अमलोह-भादसों रोड स्थित गांव चहल से कालसना तक करीब नौ करोड़ की लागत से बनने जा रही सड़क के नींव पत्थर रखने के मौके पर बुधवार को किसानों ने कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत का जबरदस्त विरोध करते हुए घेराव किया।
इस दौरान धर्मसोत के साथ शिक्षा व लोक निर्माण मंत्री विजय इंद्र सिंगला ने भी नींव पत्थर रखना था, लेकिन भारी विरोध के चलते वह मौके पर नहीं पहुंचे। उधर पुलिस की मदद से धर्मसोत ने किसी तरह से नींव पत्थर रखा और वहां से गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए।
इस मौके पहुंचीं किसान बीबीयों के साथ निपटने के लिए स्थानीय कांग्रेसी नेताओं द्वारा कुछ महिला वर्करों व मनरेगा महिला मजदूरों को बुलाया गया था। भड़के किसानों ने कहा कि वह धर्मसोत से यह जवाब लेने आए हैं कि क्या कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ किए घर-घर नौकरी देने, बेअदबी के आरोपियों को सजाएं देने, किसानों का सारा कर्जा माफ करने जैसे चुनावी वादे पूरे कर दिए हैं। अगर नहीं, तो चुनाव आचार संहिता लागू होने से कुछ महीने पहले नींव पत्थरों की ड्रामाबाजी क्यों की जा रही है। किसान नेता गुरजीत सिंह, जगतार सिंह, मनजिंदर सिंह, बलजीत सिंह ने कहा कि इस समय किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या है कि उन्हें अपनी धान की फसलों के लिए पर्याप्त बिजली सप्लाई नहीं मिल रही है। आरोप लगाया कि किसानों को दिन में केवल तीन से चार घंटे ही बिजली मिल रही है, जबकि वादा आठ घंटे का है।
किसान नेताओं ने कहा कि धर्मसोत ने पूर्व अकाली सरकार के कार्यकाल में ज्यादा बिजली सप्लाई देने के मुद्दे पर किसानों द्वारा दिए धरने में शिरकत की थी। उस समय अगर धर्मसोत किसानों का साथ दे सकते हैं, तो अब वह सरकार में हैं। फिर किसानों का दुख उनको क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। धर्मसोत को घेर कर किसान महिलाओं व पुरुषों ने बारी बारी से उनसे सवाल पूछे और संतुष्ट नही होने पर नारेबाजी शुरू कर दी।
इस मौके पहुंचे डीएसपी नाभा राजेश छिब्बड़ और थाना इंचार्ज अमृततवीर सिंब चाहल ने बड़ी मुश्किल से धर्मसोत को किसानों के गुस्से से बचाकर रखा। किसानों ने मंत्री को नींव पत्थर नहीं रखने देने को लेकर धक्के मार कर आगे आने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। साथ ही मंत्री से नींव पत्थर रखवा कर उन्हें सुरक्षित गाड़ी में बिठाकर वहां से रवाना किया।