किसानों के धरने से ट्रैफिक डायवर्ट, लालड़ू में लगी वाहनों की कतारें
अंबाला-पटियाला हाईवे पर स्थित शंभू बैरियर पर किसानों के धरने के चलते ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। प्रशासन ने अंबाला, पटियाला और लुधियाना की ओर जाने वाले वाहनों को अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे की ओर डायवर्ट कर दिया है, जिसके कारण इस मार्ग पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है।
डायवर्जन के चलते लालड़ू के आईटीआई चौक, लैहली चौक और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। सुबह से ही ट्रैफिक की रफ्तार धीमी बनी रही और कई स्थानों पर वाहन रेंगते नजर आए। इस दौरान एंबुलेंस को भी निकलने में काफी परेशानी देखी जा रही है। इससे दफ्तर जाने वाले लोगों और स्थानीय निवासियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लैहली ट्रैफिक पुलिस मौके पर तैनात रहकर यातायात को सुचारू करने में जुटी हुई है। ट्रैफिक इंचार्ज एएसआई शाम सिंह ने बताया कि शंभू बैरियर पर किसानों के बैठने के कारण ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, जिससे वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मी पूरी मुस्तैदी से ट्रैफिक को नियंत्रित करने में लगे हैं और स्थिति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पटियाला, लुधियाना की ओर जाने वाले वाहनों लैहली टी पॉइंट से लैहली बनूड जाने वाली लिंक सड़क को देखते हुए भारी वाहनो को छोड़ छोटे वाहनों को निकाला जा रहा है ताकि जाम की स्थिति ना बन सके।
दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर जमे संगरूर के किसान
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में किसान संगठनों ने अपना रुख सख्त कर लिया है। भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद दिल्ली कूच आंदोलन के तहत हाईवे तक पहुंच गया है।
भारतीय किसान यूनियन एकता (आजाद) के नेतृत्व में संगरूर इलाके के सैकड़ों किसानों ने खनौरी के समीप दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर पहुंचकर कब्जा जमा लिया और सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
प्रशासन ने पहले ही बंद की सड़क
किसान आंदोलन के दिल्ली कूच और एक्सप्रेसवे जाम की भनक लगते ही पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पहले ही दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के इस हिस्से को बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली और झंडे लेकर मौके पर पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारें तानाशाही रवैया अपनाकर जायज मांगों को उठाने वाले छात्रों, मजदूरों और किसानों की आवाज को पुलिस बल के दम पर दबाना चाहती हैं। सरकारें ऐसे फैसले ले रही हैं जो सिर्फ किसानी ही नहीं, बल्कि पूरी आम जनता के लिए बेहद खतरनाक हैं। इन जनविरोधी नीतियों को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे।
बीकेयू एकता आजाद के अध्यक्ष जसविंदर सिंह लोंगोवाल, जसवीर सिंह मेदेवास और संत राम छाजली ने कहा कि जब तक सरकारें जनविरोधी फैसले वापस नहीं लेतीं, यह संघर्ष जारी रहेगा। एक्सप्रेसवे पर किसानों के डेरा डालने से आसपास के रास्तों पर ट्रैफिक डाइवर्ट करना पड़ा है, जिससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।