संगरूर में पंचायत की जमीन पर कब्जा करते दलित।
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तीसरे हिस्से की पंचायती जमीन को लेकर दलितों और जमींदारों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अपने हिस्से की जमीन की मांग कर रहे दलित परिवारों के सब्र का बांध उस समय टूट गया जब उन्होंने जिले के पांच गांवों में अपने हिस्से की पंचायती जमीन पर जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी की अगुवाई में कब्जा जमा लिया।
कमेटी के जिलाध्यक्ष मुकेश मलौद ने कहा कि प्रदेश सरकार का दलित विरोधी चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है जो दलितों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रही है। संगरूर जिले के कई गांवों के दलित मजदूर पंचायती जमीन में अपने तीसरे हिस्से की जमीन की मांग कर रहे हैं। सरकार उनकी मांगों को पूरा करने से भाग रही है। उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन में तीसरे हिस्से की मांग और डमी बोलियां रद्द करवाने को दलितों द्वारा लगातार संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन न ही प्रशासन उनकी कोई सुन रहा है और न ही सरकार इस मसले को गंभीरता से ले रही है।
इसके चलते जिले के गांव मंडेर कलां, जलूर, घाबदा, भट्टीवाल कलां, गुआरा सहित अन्य गांवों में दलितों ने जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के नेतृत्व में दोबारा कब्जा कर लिया है। संघर्ष कमेटी के नेताओं ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते कहा कि यदि सरकार ने दलितों के मसले का तुरंत समाधान न किया तो संघर्ष को तेज कर दिया जाएगा जिसकी जिम्मेवारी सरकार और पुलिस प्रशासन की होगी।