बहुचर्चित सारू राणा केस में वीरवार को पंजाबी यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर जसबीर सिंह आहूवालिया, फाइन आर्ट्स विभाग की पूर्व हेड सरोज रानी और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ चार्ज फ्रेम हो गए।
तीनों आरोपियों पर लड़की को जबरन रोकने, उससे छेड़छाड़ करने और जान से मारने की धमकियां देने के चार्ज तय हुए हैं। अब इस मामले में आगे की सुनवाई चीफ जुडीशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में होगी।
पीड़िता व उसकी मां सुल्ताना बेगम के वकील सतीश करकरा ने बताया कि साल 2002 में पंजाबी यूनिवर्सिटी की छात्रा को फाइन आर्ट्स विभाग की तत्कालीन हेड सरोज रानी ने मजबूर करके तत्कालीन वीसी जसबीर सिंह आहलूवालिया के दफ्तर में भेजा। वहां जाने पर वीसी ने छात्रा को अपने रिटायरिंग रूम में बैठने को कहा। थोड़ी देर बाद वीसी भी पीछे-पीछे आ गया और उसने छात्रा फाइन आर्ट्स विभाग के खिलाफ शिकायतें न करने की सलाह देते हुए उसकी बाजू पकड़ कर अपनी तरफ खींचा। छात्रा ने घबराकर वीसी को धक्का मारा और तुरंत दफ्तर से बाहर निकल गई।
बाद में पुलिस ने तत्कालीन वीसी, सरोज रानी और एक पीयू मुलाजिम जसपाल के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। बाद में पटियाला की सेशन कोर्ट में भी चार्ज फ्रेम हो गए थे। इसी बीच जसबीर सिंह आहलूवालिया पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चला गया था। जहां पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के आदेश दे दिए थे।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ छात्रा सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 12 साल बाद इस केस में पटियाला की सेशन कोर्ट को आदेश दिए थे कि इस केस में कौन सी धारा बनती है, उस पर विचार के बाद चार्ज फ्रेम किए जाएं।
वीरवार को पटियाला में एडिशनल सेशन जज संदीप जोशन की कोर्ट में पंजाबी यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी जसबीर सिंह आहलूवालिया, फाइन आर्ट्स विभाग की पूर्व हेड सरोज रानी समेत एक पीयू मुलाजिम के खिलाफ धारा 354, 341, 506, 120-बी के तहत चार्ज फ्रेम हो गए।