पुलिस ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अफसर चंडीगढ़ की शिकायत पर प्राथमिक जांच के बाद जालसाजी ढंग से दो पासपोर्ट जारी करवाने वाले सरकारी अध्यापक के खिलाफ केस दर्ज किया है। प्राथमिक जांच में आरोपी ने पुलिस को बताया कि ये पासपोर्ट उसके पिता ने बनवाए थे।
इस मामले के तफतीशी अफसर हवलदार सुखपाल सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय पासपोर्ट अफसर चंडीगढ़ ने जिला पुलिस प्रमुख को पत्र लिखा था कि सरबजीत सिंह संघा निवासी 5बी टैंकीवाली गली मोगा ने 16 अगस्त 1988 को क्षेत्रीय पासपोर्ट दफ्तर चंडीगढ़ से पासपोर्ट जारी करवाया। इसके बाद वह अमेरिका चला गया था और वहां उसका पासपोर्ट गुम होने से वह एमरजैंसी स्लिप हासिल कर भारत आया था।
इसके बाद आरोपी सरबजीत सिंह ने 1999 में राजवीर सिंह के नाम पर पासपोर्ट जारी करवा लिया और यह पासपोर्ट बनाने समय पर पहले पासपोर्ट का कोई जिक्र नहीं किया। जिला पुलिस प्रमुख के आदेशों पर इस मामले की एसपी (डी) हरजीत सिंह पन्नू ने प्राथमिक जांच की। पुलिस मुताबिक सरबजीत सिंह का बचपन का नाम राजवीर सिंह था और उसने पहले पासपोर्ट में सरबजीत सिंह संघा के नाम पर जारी करवाया।
इस पासपोर्ट में पत्नी का नाम गुरशरन कौर और जन्म स्थान जगरांव दर्ज करवाया गया था। इस मामले की प्राथमिक जांच में पुलिस के पास पेश किए अपने विवाह के सर्टिफिकेट में नाम सरबजीत सिंह भुल्लर और जन्म सर्टिफिकेट में नाम राजवीर सिंह और जन्म स्थान अजीतवाल दर्ज है।
इस जांच समय पर आरोपी ने पुलिस को कहा कि यह पासपोर्ट उसके पिता ने बनवाए थे। उसका पहला विवाह गुरशरन कौर पुत्री कुलदीप सिंह निवासी मोगा से हुआ था। उसके साथ तलाक होने बाद दूसरा विवाह हरप्रीत कौर पुत्री दर्शन सिंह निवासी शहीद ऊधम सिंह नगर फिरोजपुर से हुआ था।