पटियाला। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के प्रदेश प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां ने रविवार को कहा कि केंद्र व पंजाब सरकार दूध की धुली न बनें, जितनी भी कोविड से मौतें हुईं, उनके लिए दोनों बराबर जिम्मेदार हैं। डब्ल्यूएचओ की चेतावनी के बावजूद कोरोना की दूसरी लहर से बचने व लोगों के इलाज के लिए पहले से कोई प्रबंध नहीं किए गए। साथ ही उगराहां ने कैप्टन सरकार और अकाली दल (बादल) के अंदर से एक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 2013 में तत्कालीन अकाली दल सरकार एपीएमसी एक्ट लाई थी, जिसे कांग्रेस ने रद्द करने का वादा किया था। फिर इस वादे पर कांग्रेस खरी क्यों नहीं उतरी।
उगराहां ने कहा कि कहने को कैप्टन सरकार कहती रहती है कि खेती कानूनों को लेकर पार्टी किसानों के साथ है। किसान नेता पटियाला के पुडा ग्राउंड में चल रहे किसानों के धरने के अंतिम दिन शिरकत करने पहुंचे थे। मीडिया से बात करते हुए जोगिंदर उगराहां ने कहा कि केंद्र व पंजाब सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए किसानों पर कोरोना फैलाने के बेबुनियाद आरोप लगा रही है। जिसकी उनकी जत्थेबंदी कड़ी निंदा करती है। उगराहां ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना से साढ़े तीन लाख मौतें हुई हैं, लेकिन आंकड़े ज्यादा भी हो सकते हैं। इनके लिए केंद्र व पंजाब की सरकार बराबर की जिम्मेदार हैं। क्योंकि कोरोना के पीक में मरीजों को सरकारी अस्पतालों में न बेड मिले, न ऑक्सीजन और न दवाएं। प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों से खूब लूट हुई। इसलिए पंजाब सरकार को बड़े प्राइवेट अस्पतालों को अपने अधीन लेना चाहिए। उगराहां ने कहा कि पंजाब सरकार का जोर बस लॉकडाउन पर लगा हुआ है, जबकि सरकारी अस्पतालों में न डाक्टर, न नर्सें और न कोरोना रोकने प्रबंध है। गांवों की डिस्पेंसरियों में कोई स्टाफ नहीं है।
अहंकारी है मोदी सरकार, पत्र का अब तक कोई जवाब नहीं : राजेवाल
संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अहंकारी है। राजहठ में सरकार ने अब तक संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से लिखे पत्र का भी कोई जवाब नहीं दिया है, जिसमें खेती कानूनों को लेकर केंद्र से किसान जत्थेबंदियों के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने की अपील की गई थी। एक सवाल के जवाब में राजेवाल ने कहा कि केंद्र के साथ बैठकों में खेती कानूनों पर बहस करके किसान नेताओं ने इन्हें पहले ही गलत साबित कर दिया है। यह कानून न किसानों और न देश के हित में हैं। इसलिए केंद्र का डेढ़ साल तक इन कानूनों को रोकने या फिर संशोधन करने का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। इन खेती कानूनों को केंद्र को हर हाल में रद्द करना ही होगा। इस मौके पर एमएसपी की कानूनी गारंटी देने की भी केंद्र से मांग की गई। राजेवाल ने कहा कि फिर चाहे किसानों की फसलें प्राइवेट कंपनियां खरीदें या फिर सरकार। किसानी मोर्चे में पश्चिम बंगाल की युवती से सामूहिक दुष्कर्म पर कहा कि वारदात में संयुक्त किसान मोर्चे का कोई भी नुमाइंदे शामिल नहीं था।