बाल सुरक्षा विभाग ने स्कूली बच्चों की खुशी और गम जानने के लिए जिले में आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद के गांव गुलाडी तथा बेनड़ा के स्कूलों में खुशी तथा उदासी नाम के बक्से लगाए हैं। इनमें बच्चे अपनी समस्याओं के साथ-साथ अपने दुख-सुख लिखकर इनमें डालेंगे, जिनपर विभाग उचित कार्रवाई करेगा।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत संगरूर जिले के दो गांव बेनड़ा तथा गुलाडी के स्कूलों में खुशी (हैप्पी और उदासी (सैड) नाम के बक्से लगाए हैं। इन बक्सों में बच्चा अपना किसी भी तरह की शिकायत, जिसमें अध्यापक, अभिभावकों अथवा उसके वारिसों द्वारा किसी तरह की मारपीट करना, दोस्त अथवा पड़ोस की तरफ से किसी तरह की कोई परेशानी आदि मुख्य तौर पर शामिल हैं, के बारे में लिखित शिकायत दे सकता है।
इस बक्से की चाबियां बाल सुरक्षा विभाग के पास हैं और विभाग के कर्मचारी ही इन शिकायतों को बक्सों से निकालेंगे। इस तरह स्कूल अथारिटी खिलाफ भी शिकायत करने का अवसर बच्चों को मिलेगा।
इस योजना का उद्देश्य बच्चों में अपनी समस्याएं बताने की हिम्मत पैदा करना और उन्हें एक प्लेटफार्म देना है। इससे विभाग को उम्मीद है कि इससे बच्चों में अपने अधिकारों प्रति एक नई चेतना आएगी और उन्हें भय से मुक्ति मिलेगी।
जिला बाल सुरक्षा अधिकारी नवनीत कौर तूर ने बताया कि बच्चों की सही फीडबैक लेने के लिए खुशी (हैप्पी) नाम के बक्से भी स्कूलों में लगाए गए हैं, ताकि बच्चे खुश होने की स्थिति में विभाग को फीडबैक दे सकें और विभाग उसके मुताबिक प्रोग्राम तथा नीतियां बनाने में सरकार की मदद कर सके। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह प्रोजेक्ट उक्त दोनों गांवों में है और यदि इसका रिस्पांस अच्छा मिला तो जिले के सभी स्कूलों में ऐसे बक्से लगा दिए जाएंगे।