भाखड़ा डैम का सारा प्रबंध आज भी दशकों पुरानी बनाई गईं टीन की छतों वाले कार्यालयों के नीचे चल रहा है।
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड 22 अक्टूबर को डैम के 50 साल पूरे होने पर गोल्डन जुबली समारोह मनाने जा रहा है। इतने साल बाद भी नंगल में स्थित बोर्ड के कार्यालयों की इस हालत की तरफ किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
जब भाखड़ा डैम का निर्माण शुरू हुआ तब प्रबंधकों ने अस्थायी तौर पर कार्यालयोें का निर्माण कर इनकी छतें लोहे की टीनों से बनाई थीं। डैम का निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर आज तक छह दशक से भी ज्यादा समय बीत चुका है पर ये कार्यालय अब तक टीन की छत्तों के नीचे ही चल रहे हैं।
इन कार्यालयों में पड़ा है महत्वपूर्ण रिकॉर्ड
मुख्य तौर पर चीफ इंजीनियर कार्यालय, फील्ड कार्यालय, खजाना कार्यालय, कार्यकारी इंजीनियर मैकेनिकल, कार्यकारी इंजीनियर टाउनशिप, पीआरओ कार्यालय आदि की छत्ते लोहे की टीन की बनी हुई हैं। इन कार्यालयों में कुछ तो जमीनी मंजिल पर कंकरीट के बने हैं जबकि उनकी पहली मंजिल लोहे की टीन से ही बनी हुई है।
इन सभी कार्यालयों में ही बोर्ड का सारा महत्वपूर्ण रिकॉर्ड पड़ा है। कई कार्यालयों की खिड़कियां भी टूट चुकी हैं और उसको जुगाड़ लगा कर बंद किया हुआ है। बोर्ड का रिकॉर्ड रखने के लिए पुराने जमाने के संदूकों का ही प्रयोग किया गया है जो आज भी इन टीनों के नीचे बिना किसी ताले के पड़े हैं।
बारिश में हो सकता है रिकॉर्ड खराब
भाखड़ा डैम के कर्मचारी संघ के प्रधान दीवान चंद, जनरल सचिव हरपाल राणा ने कहा कि बहुत दुख की बात है कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड गोल्डन जुबली पर करोड़ों रुपये खर्च करने जा रहा है पर कार्यालयों की हालत सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बरसात में कार्यालय में पडे़ रिकॉर्ड के खराब होने का अंदेशा बना रहता है।
केंद्र से बात करेंगे : सांसद
आनंदपुर साहिब से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने टीन की छत्तों के नीचे चल रहे भाखड़ा डैम के नंगल में चल रहे कार्यालयों की हालत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस बारे में जल्द ही केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखेंगे और 22 अक्टूबर को होने वाले विशेष समारोह के दौरान इसकी मांग भी उठाएंगे।