बैंकों के सभी बड़े डिफॉल्टरों की सूची 19 को सार्वजनिक की जाएगी। ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन यह कदम उठाने जा रही है। बैंकों पर बढ़ रहे कर्जों का बोझ सीधे रुप से अधिकारियों और कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। ऐसे में बैंक कर्मचारी अब सरकार के सामने यह मांग उठाने जा रहे हैं कि डिफॉल्टरों की संपत्ति जब्त करने जैसे कानून बनाए जाएं।
बैंक एसोसिएशनों से जुड़े पदाधिकारियों के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से 2013 में जारी आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों के डिफॉल्टरों की राशि का आंकड़ा एक लाख 64 हजार 461 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें उन डिफॉल्टरों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिन्होंने एक करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज ले रखा है। इसमें कई कारपोरेट घराने भी शामिल हैं। इन उद्यमियों और व्यवसायियों की तरफ से लगातार बड़े कर्ज लिए गए हैं लेकिन कर्ज लौटाए नहीं जा रहे। ऐसे में बैंक अधिकारियों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। इसलिए ही आम लोगों के बीच ऐसे लोगों को सूचियों के जरिए लाए जाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के संयुक्त सचिव एसके गौतम ने बताया कि बैंकों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है लेकिन साथ ही डिफॉल्टर बढ़ रहे हैं। छोटे कर्जधारकों से कर्ज वसूलने के लिए कानून हैं लेकिन बड़े कर्जधारक साफ तौर पर बचकर निकल रहे हैं। जबकि इसकी गाज बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर गिर रहा है।
उनकी एसोसिएशन जल्द ही 19 जुलाई को जालंधर में होने जा रहे अधिवेशन में ऐसे डिफॉल्टरों की सूची जारी करने का फैसला किया है। सूची में हर राज्य के डिफॉल्टरों के नाम होंगे। इससे यह बात सामने आ सकेगी कि किस बैंक और किस राज्य के कितने बड़े घराने डिफॉल्टर हैं। इसके साथ ही एसोसिएशन यह मांग भी सरकार तक पहुंचा रही है कि इन डिफॉल्टरों से पैसा निकलवाने के लिए कड़े कानून बनाने की जरूरत है।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक सार्वजनिक बैंकों ने 1969 के बाद लगातार अपना कारोबार बढ़ाया है। बैंकों की जमा राशियां 4,646 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। वहीं बैंकों की ब्रांचों की संख्या बढ़कर भी 8,268 से 85 हजार तक पहुंच गई है।
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला यूनियन के सचिव यादविंदर गुप्ता के मुताबिक डिफॉल्टरों की संख्या बढ़ने से बैंकों के कारोबार पर असर पड़ रहा है। सार्वजनिक बैंकों की तरफ से लगातार मेहनत कर बैंकों का विकास किया जा रहा है। इसलिए सरकार को भी चाहिए कि डिफॉल्टरों से रिकवरी के लिए कड़े कानून बनाए।
सबसे ज्यादा कर्जदार एसबीओपी के
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का 24530 मिलियन रुपया एनपीए में चला गया है। वहीं पंजाब नेशनल बैंक का 134658 मिलियन रुपया और पंजाब एंड सिंध बैंक का 15369 मिलियन रुपया भी कर्ज लेने वालों के पास फंस गया है। वहीं बैंकों की तरफ से दिए गए एडवांसेज में एनपीए की प्रतिशतता की बात की जाए तो इसमें यूको बैंक 5.42 फीसदी के साथ पहले पायदान पर है। वहीं देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 4.75 फीसदी के साथ दूसरे और स्टेट बैंक ऑफ मैसूर 4.52 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर है।