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रुद्रा अलायॅज की लोहा भट्ठी धमाके में तीन और मजदूरों ने दम तोड़ा

Fri, 27 Nov 2015 03:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, /मंड़ी गोबिंदगढ़ साहिब
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पिछले शनिवार को रुद्रा अलायॅज में हुए फर्नेस हादसे में घायल तीन मजदूरों ने बुधवार रात लुधियाना के सीएमसी अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसी के साथ हादसे में मरने वालों की संख्या सात हो गई है।
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प्रवासी भलाई बोर्ड के चेयरमैन आरसी यादव एवं बोर्ड के सदस्य कौशल मिश्रा ने बताया कि मृतकों की पहचान फग्गू लाल पुत्र आरती लाल वासी गांव भवानीपुर थाना गौरीगंज जिला झापा नेपाल, रोशन कुमार पुत्र जवाहर महाते निवासी दाड़ही थाना बेलदोर जिला खगड़िया बिहार और देव सिंह पुत्र फागू सिंह निवासी जुरदिया जिला मरम नेपाल के तौर पर हुई है।

हादसे में घायल हुए पांच लोगों की हालत अभी भी गंभीर है। इनमें फागू लाल 65 फीसदी जल गया था, रोशन कुमार 45 प्रतिशत और देव 45 प्रतिशत तक झुलस चुके थे। रोशन कुमार की मौत उस समय हुई जब वह बाथरूम के लिए अपने बेड से निकला था। तीन मजदूरों को बुधवार को आईवीआई खन्ना अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी।
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जिला औद्योगिक केंद्र फतेहगढ़ साहिब के डिप्टी डायरेक्टर सुखविंदर सिंह गिल ने बताया कि रुद्रा फर्नेस हादसे में मालिकों पर फैक्टरी एक्ट-7ए2सी के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। शुक्रवार को हादसे की सारी रिपोर्ट तैयार करके डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज को भेजी जा रही है।

डिप्टी डायरेक्टर ने कहा कि फर्नेस में इतने बड़े हादसे के लिए पहले मिल मालिक और फिर फर्नेस मैनेजमेंट जिम्मेदार है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक यह हादसा भट्ठी में करीब दो टन वजनी बंद खोल लोहे के जाने से घटा है। इससे स्टीम पैदा हो गई थी और ज्यादा गैस भरने से वह फटकर बाहर आ गिरा।

अगर लोहे का यह पीस काटकर भट्ठी में डाला जाता तो शायद यह घटना न घटती। यह मिल मैनेजमेंट और मालिकों की सीधी लापरवाही है। उन्होंने फैक्टरी मालिकों पर फैक्टरी एक्ट-7ए2सी के तहत लेबर को सेफ्टी किट प्रदान न करने, अनट्रेंड सुपरवाइजरों से काम लेने और स्क्रैप छांटकर न डालने आदि धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

हम साल भर में मिल मालिकों को बुलाकर लेबर सेफ्टी प्रोग्राम करते हैं जिसके दूसरे प्रोग्राम की तैयारी चल रही है। एक प्रोग्राम पांच महीने पहले हुआ था। हमें तो फैक्टरी मालिकों को मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी दिशा निर्देश देने होते हैं। अगर कोई मिल मालिक इसे लागू नहीं करता तो उस पर विभागीय कार्रवाई की जाती है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेफ्टी किट सभी औद्योगिक इकाईयों को मालिकों द्वारा प्रदान करवाई जाती है। जहां कहीं इस किट को महंगा होने के कारण प्रयोग में नहीं लाया जाता तो कार्रवाई की जाएगी।
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