पटियाला पुलिस ने दूधमुंहे बच्चों की खरीद-फरोख्त में लगे एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार महिलाओं समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर एक नवजात बच्चे को बरामद कर लिया।
इस बच्चे को बेचने के लिए मुजफ्फरनगर से पटियाला लाया गया था। पुलिस ने अमृतसर निवासी एक महिला ऊषा और उसके एक अन्य साथी पटियाला से धर दबोचा, जबकि इस धंधे में शामिल तीन अन्य महिलाओं को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मुजफ्फरनगर से लाया गया बच्चा वहां दंगा पीड़ित कैंप से तो नहीं लाया गया। इसके अलावा, बच्चे को खरीद कर लाया गया है या उसका अपहरण किया गया है।
एसएसपी हरदियाल सिंह मान ने रविवार को पुलिस लाइन में आयोजित पत्रकार वार्ता में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि तीन जनवरी को थाना सिविल लाइन की एसआई निर्दोष कौर पुलिस टीम के साथ ठीकरी वाला चौक पर तैनात थी।
उन्हें सूचना मिली कि बटाला रोड अमृतसर स्थित पवन नगर की रहने वाली ऊषा और माहना रोड अमृतसर निवासी चरनजीत सिंह करीब एक महीने के नवजात बच्चे को लेकर गुरुद्वारा श्री मोती बाग साहिब के पास इंडिका कार (नंबर पीबी-01-1996) में बैठे हैं और बच्चे को बेचने के लिए ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस ने छापा मारकर दोनों को नवजात बच्चे समेत काबू कर लिया।
पूछताछ में ऊषा और चरनजीत नवजात बच्चे के बारे में कोई संतोषजनक जवाब न दे सके। इसके चलते पुलिस ने दोनों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में धारा 363 ए और 34 के तहत केस दर्ज कर लिया और नवजात को राजिंदरा अस्पताल के बच्चा वार्ड में दाखिल करवा दिया।
बच्चा मुजफ्फरनगर राहत कैंप से नहीं लाया गया?
एसएसपी ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह लंबे समय से बच्चे बेचने का धंधा कर रहा है। उन्होंने बताया कि गैंग की सदस्य ऊषा के खिलाफ पहले भी लुधियाना में ऐसा ही एक मामला दर्ज किया गया था।
आरोपियों ने पूछताछ में माना कि वह इस बच्चे को मुजफ्फरनगर से एक दलाल के जरिये एक लाख 30 हजार रुपये में खरीद कर लाए थे। पूछताछ के आधार पर ही पटियाला पुलिस की टीमें देहरादून गईं, जहां से इनकी निशानदेही पर पुलिस ने मधु, आनंदी और शाहजहां नामक तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी ने बताया कि ऊषा और चरणजीत से बरामद बच्चे की मां की पहचान भी कर ली गई है। उसका नाम सलमा है।
उन्होंने बताया कि बच्चे की मां से पूछताछ के बाद सारे मामले की सच्चाई का पता चलेगा। यह पता लगाया जाएगा कि बच्चे को आरोपियों ने मुजफ्फरनगर से अगवा किया था या खरीदा था। साथ ही, बच्चा मुजफ्फरनगर के राहत शिविर से तो नहीं लाया गया था?