ढाकी रोड से सब्जी मंडी को निकलने वाले रास्ते पर बुधवार को मार्केट कमेटी ने पीला पंजा चलाकर 20 घर और 10 दुकानें ढहा दीं।
लोगों का आरोप है कि ऐसा करने से लोग बेघर तो हुए ही हैं उनका कारोबार भी खत्म हो गया है। मजबूरी में उन्हें आसपास के क्षेत्रों में किराये पर रहना पड़ रहा है।
मुआवजा राशि को लेकर अभी कोर्ट में मामला चल रहा है।
दो दुकानें और अपना घर खोने वाले राजेंदर सिंह पुत्र रतन सिंह ने बताया कि वह और उनके भाई अपने माता-पिता, बच्चों के साथ आठ मरले के मकान व साथ ही बनी दुकानों में रह रहे थे।
उनका कहना है कि प्रशासन ने मात्र 246 रुपये मरले के हिसाब से ही मुआवजा दिया है। जबकि आज के हिसाब से उनके घर और दुकानों की कीमत लाखों में है।
जो मुआवजा दिया गया है उसमें मकान खरीदना तो दूर किराये में भी मकान मिलना मुश्किल है। उनका आरोप है कि उन्हें खजाना ऑफिस में आए मुआवजे के पैसे भी नहीं मिले हैं।
उन्होंने कहा कि उनका आशियाना तो उजड़ा ही है कारोबार भी उजड़ गया है। हालांकि उन्हें सड़क बनने के बाद आसपास बनने वाली दुकानों में रिजर्व रेट के हिसाब से दुकानें देने का आश्वासन दिया गया है लेकिन वो मौखिक है।
टीम की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाते हुए उन्होंने कहा कि दो घर और दुकानें और रास्ते के बीच आती हैं लेकिन उन्हें नहीं तोड़ा गया।
जानकारी के अनुसार सभी मोहल्ला वासियों की ओर से आज के डीसी रेट के हिसाब से पैसे को लेकर एक वर्ष पूर्व कोर्ट में केस भी किया गया है।
अब तक कोई हल नहीं निकला। डीजीएम रामपाल का कहना है कि जो भी मकान या दुकानें हटाईं गई हैं उन्हें पहले सही नोटिस दे दिया गया था। जो लोग अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं उन्हें सरकारी रेटों के तहत मुआवजा दिया गया है।