केंद्रीय मंत्री बनने की दौड़ में गुरदासपुर सीट से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले फिल्म अभिनेता विनोद खन्ना भी शामिल हैं। वे साल 2002 में अटल सरकार के दौरान संस्कृति और पर्यटन मंत्री पद का दायित्व निभा चुके हैं।
भाजपा के टिकट पर चौथी बार सांसद बनने के बाद खन्ना को एक बार फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में जगह मिलने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो उन्हें किसी अहम मंत्रालय का दायित्व सौंपा जा सकता है।
इस बार के लोकसभा चुनाव में 1,36,106 मतों के अंतर से जीते विनोद खन्ना ने कांग्रेस के प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा द्वारा साल 1999 में मिली शिकस्त का हिसाब चुकता किया है। गुुरदासपुर सीट से लगातार तीन बार सांसद बनने के बाद 1999 में कांग्रेसी उम्मीदवार प्रताप सिंह बाजवा ने विनोद खन्ना को हराया था।
आखिरकार खन्ना ने इस बार जीत दर्ज कर धमाकेधार वापसी की है। विनोद खन्ना के चौथी बार विजयी घोषित होने से अब गुरदासपुर तथा पठानकोट के भाजपा सर्मथक, वर्कर और पार्टी के नेताओं के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
साल 1997 में शुरू किया सियासी सफर
खन्ना ने राजनीति में अपना कैरियर 1997 में भाजपा में शामिल होकर शुरू किया। 1998 में उन्हें कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली गुरदासपुर सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार सुखवंस कौर के खिलाफ मैदान में उतारा गया। खन्ना के फिल्मी अंदाज को पसंद करते हुए लोगों ने उन्हें 1,06,833 मतों से विजयी दिलाई।
इतना ही नहीं दोबारा 1999 के चुनाव में खन्ना ने सुखवंस कौर भिंडर को मात्र 1399 मतों से शिकस्त दी थी। इसके बाद 2004 के चुनाव में एक बार फिर उन्होंने भिंडर को 24983 मतों से पराजित कर इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाई। हालांकि साल 2009 में खन्ना को कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने 8342 मतों से पराजित किया था।
विदेश मंत्रालय में भी निभाया चुके हैं भूमिका
जुलाई 2002 में विनोद खन्ना को तत्कालीन अटल सरकार के मंत्रिमंडल में संस्कृति और पर्यटन मंत्री पद से नवाजा गया था। करीब छह माह बाद ही खन्ना को विदेश राज्य मंत्री भी बनाया गया। इस दौरान उनकी छवि बेदाग ही रही। अब देखना यह है कि विनोद खन्ना को मंत्री बनाने को लेकर जारी अटकलें कहां तक सच साबित हो सकती हैं।