साहित्यिक संस्था अलग दुनिया की ओर से इंडियन ऑयल के पठानकोट सेल्स एरिया के प्रबंधक जय प्रकाश लिलवान को वर्ष 2014 के नामदेव ढसाल राष्ट्रीय काव्य पुरस्कार से नवाजा गया है।
लिलवान को ये पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया है। उन्हें ये सम्मान लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय दलित साहित्य महोत्सव में दिया गया।
11 नवंबर 1966 को हरियाणा में झज्जर के गांव निलोठी निवासी जय प्रकाश लिलवान की स्कूल के दिनों से ही साहित्य में विशेष रुचि है। उनकी कविताएं कई पत्र-पत्रिकाओं में छप चुकी हैं। विधिवत रूप से उनका पहला कविता संग्रह अब हमें ही चलना है सन् 2002 में प्रकाशित हुआ।
सात वर्ष्ज्ञ बाद उनके दो और कविता संग्रह नए क्षितिजों की ओर और समय की आदमखोर धुन वर्ष 2009 में प्रकाशित हुए। इसी तरह से उन्होंने मां की दुर्दशा को दरशाता ओ भारत मां! हमारा इंतजार करना 2013 भी लिखा है। इसके अलावा उन्होंने एक फिल्म की पटकथा भी लिखी है।
उन्होंने बताया कि देश को साहित्य के क्षेत्र में एक और नोबेल दिलवाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि वह दो और कविता संग्रह पर काम कर रहे हैं जो जल्द ही प्रकाशित होंगे।