गेहूं की फसल पर जहां एक ओर प्रतिकूल मौसम की मार पड़ी, वहीं अब इसकीलिफ्टिंग की व्यवस्था भी खामी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में पिछले चार दिनों से गेहूं की लिफ्टिंग ठप है।
ऐसे में अब किसानों को डर सता रहा है कि कहीं उनकी मेहनत की उपज बर्बाद न हो जाय। वैसे मौसम की मार के कारण उपज कम होने से इस बार मंडी में पिछले वर्ष के मुकाबले गेहूं कम ही पहुंचा है। इस बीच चार दिनों से लिफ्टिंग न होने से गेहूं मंडी में ही पड़ा नजर आ रहा है। किसानों को इसकी कीमत ही नहीं मिल पा रही है। मंडी में गेहूं की बेकदरी का आलम यह है कि यहां इसे लावारिस मवेशी खा रहे हैं।
बुधवार को मंडी का नजारा ऐसा था कि यहां गहमागहमी बेहद कम थी। पिछली बार यहां करीब 2 लाख 97 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की गई थी। वहीं इस बार केवल एक लाख 60 हजार क्विंटल गेहूं ही मंडी में पहुंचा है। इस बार सरकार की ओर से 1400 रुपये क्ंिवटल गेहूं का रेट निर्धारित किया गया है। इस हिसाब से अब तक मंडी को 5908000 रुपये एकत्रित हुए हैं। इंस्पेक्टर पनग्रेन विशाल का कहना है कि किसानों को 48 घंटे के भीतर ही उनके पैसे दे दिये जाते हैं, लेकिन इस बार मंडी में गेहूं की आवक कम हुई है।
उधर, किसान जनक राज ने बताया कि पिछले 4 दिनों से उनकी गेहूं नहीं उठाई जा रही। बड़ी मुश्किल से बुधवार को गेहूं उठाई गई है। वहीं किसान सूरज सिंह निवासी ताजपुर ने बताया कि यहां न तो पीने के पानी की सुविधा है और न ही विद्युत का प्रबंध है।
मंडी में पानी के लाले
मंडी में मौजूद मजदूर दरबारी लाल ने बताया कि वह 20 अप्रैल को यहां आए थे। तब से वह यहां रह रहे हैं, लेकिन पानी की सुविधा न होने के चलते उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहां न तो नहाने के लिए पानी मिल पा रहा है और न ही पीने के लिए। वहीं एक मजदूर ने बताया कि पिछले लिफ्टिंग न होने के कारण मजदूरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दी सफाई
मंडी के सेक्रेटरी बलवीर सिंह बाजवा ने बताया कि मंडी में वाटर कूलर लगाया हुआ है, पानी यहां उपलब्ध है। वहीं विद्युत सेवा भी पूरी तरह से दी जा रही है। लिफ्टिंग के संबंध में उन्होंने कहा कि यह सारी जिम्मेदारी परग्रेन की है, इनको मंडी की ओर से बीते दिनों नोटिस भेजा गया था, लेकिन इस संबंधी जो कुछ होगा पनग्रेन ही करेगा।