गुरदासपुर। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, जालंधर की कार्रवाई के आधार पर जिला गुरदासपुर में जाली जन्म प्रमाणपत्र बनाए जाने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला पुलिस ने ये प्रमाणपत्र बनवाने वाले 110 व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद पासपोर्ट कार्यालय, जालंधर ने दूसरे संदिग्ध मामलों की भी जांच करवाने और बनाए जा चुके पासपोर्ट वापस मंगाने का सिलसिला शुरू कर दिया है। गुरदासपुर के डीसी ने भी इस मामले की जांच शुरू करवा दी है। एसएसपी एसएस गिल ने कहा है कि जांच की जा रही है।
जालंधर के क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि पासपोर्ट बनाने के लिए जन्म प्रमाणपत्र के अतिरिक्त अन्य जरूरी दस्तावेजों की प्रामाणिकता के शक होने पर वे उस दस्तावेज को संबंधित विभाग के पास भेजकर उसके असली होने की जांच करवाते हैं। इसके तहत पिछले करीब सात माह के दौरान बचे हुए केसों की जांच करने पर यह बात सामने आई कि संबंधित विभागों ने जिन प्रमाणपत्रों की जांच करके रिपोर्ट नहीं भेजी उनमें से 75 प्रतिशत प्रमाणपत्र गुरदासपुर जिले से संबंधित हैं। गिल ने बताया कि इस मामले में उन्होंने कई पत्र लिखे लेकिन गुरदासपुर से संबंधित प्रमाणपत्रों की जांच पर कोई जवाब न आने पर उन्हें यह मामला संदिग्ध लगा। उन्होंने गुरदासपुर के डीसी डा. अभिनव त्रिखा से बात की जिन्होंने तुरंत बकाया जांच रिपोर्ट भेजने के लिए कार्रवाई शुरू करवाई। इस दौरान यह बात सामने आई कि पासपोर्ट कार्यालय द्वारा जांच के लिए भेजे गए 110 जन्म प्रमाणपत्र जाली थे। इस कारण पुलिस स्टेशन सिटी गुरदासपुर में पुलिस ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की ओर से भेजे पत्र के आधार पर 110 व्यक्तियों के विरुद्ध धारा 420, 465, 467, 468, 471 अधीन मामला दर्ज कर लिया गया है।
आठ से बीस हजार रुपये में बिकता था सर्टिफिकेट
पासपोर्ट अधिकारी गिल ने खुलासा किया है कि पासपोर्ट के लिए ये प्रमाणपत्र लगाने वाले लोग उनसे मिलकर यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने गुरदासपुर में संबंधित ब्रांच से ही सर्टिफिकेट बनवाए हैं और सर्टिफिकेट तैयार करने वाले व्यक्ति के टेलीफोन नंबर तथा नाम भी स्पष्ट रूप में दे रहे हैं। इसके साथ ही ये लोग यह बात भी कबूल कर रहे हैं कि उन्होंने सिर्फ अपनी परेशानी से बचने तथा जल्द कार्य करवाने के लालच में 8 से 20 हजार रुपये तक खर्च करके सर्टिफिकेट प्राप्त किए हैं और ये पैसे दिलवाने के लिए इस कार्यालय के बाहर चाय के खोखे वाले व अन्य दुकानदारों सहित कई एजेंट मौजूद हैं।
कुछ ही दिनों में प्रक्रिया बदलेंगे
डा. अभिनव त्रिखा ने कहा कि अभी सिर्फ यह बात सिद्ध हुई है कि ये सर्टिफिकेट जाली हैं, इस कारण ये सर्टिफिकेट प्रयोग करने वाले लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह तक जाने के लिए कार्रवाई जारी है और जो अधिकारी या व्यक्ति इसमें आरोपी पाया गया उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जन्म मृत्यु सर्टिफिकेट बनाने के कार्य में पारदर्शिता लाने के लिए एक साफ्टवेयर तैयार करवाया जा रहा है और इस कार्य को सुविधा केन्द्रों से आसान बनाया जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे।