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आठ विचाराधीन कैदियों की हालत बिगड़ी

Sat, 09 Nov 2013 10:54 PM IST
पठानकोट
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सब जेल पठानकोट में विचाराधीन कैदी पिछले तीन दिन से भूखहड़ताल पर चल रहे हैं। शनिवार को भूखहड़ताल के कारण आठ विचाराधीन कैदियों की हालत बिगड़ गई और उनमें से छह को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्हें ड्रिप और आक्सीजन तक लगानी पड़ गई।
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कैदियों ने जिला पुलिस पर नशे तस्करी के झूठे मामलों में फंसाने के आरोप लगाए हैं और मामले की जांच कराकर इंसाफ दिलाने की मांग की है। वहीं जेल में विचाराधीन कैदियों के भूखहड़ताल पर चले जाने से जेल प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए हैं और मीडिया में बात करने से गुरेज किया जा रहा है। उधर, पुलिस कप्तान (हेडक्वार्टर) नरेंदर बेदी ने सारे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

जानकारी के मुताबिक सब जेल में बंद सभी विचाराधीन कैदी जिला पुलिस पर झूठे मामलों में फंसाने का आरोप लगाते हुए पांच नवंबर से भूख हड़ताल पर चले गए हैं। रातभर विचाराधीन कैदी जिला पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। वहीं तीन दिन भूखे रहने पर शनिवार को आठ कैदियों की हालत अचानक खराब हो गई।
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उनमें से जम्मू-कश्मीर के काना चक्क के कुलदीप राज, डियाना के विक्रम सिंह, हिमाचल प्रदेश के नूरपुर तहसील के गांव कंडवाल निवासी राजेश पठानिया, पठानकोट के गांव मिर्जापुर कुलियां निवासी कुलदीप, जुगियाल निवासी रोहित शर्मा और कंवाल निवासी वरिंदर को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनमें से कुछ को ड्रिप और आक्सीजन लगाई गई।

राजेश पठानिया ने आरोप लगाया कि हिमाचल में सामाजिक कार्यकर्ता होने के नाते कंडवाल इलाके में चल रहे देह व्यापार के अड्डे के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। वहां के कुछ ऊंची पहुंच के लोगों ने पठानकोट पुलिस से सांठगांठ कर उन्हें पठानकोट बहाने से बुलाया, जहां पर पुलिस ने उन्हें पकड़कर नशीले पाउडर के मामले में फंसा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि नशा तस्करी रोकने के बजाय पुलिस नौजवान पीढ़ी पर झूठे मामले बनाकर अपनी पीठ थपथपा रही है। उन्होंने सारे मामले की जांच कराने की मांग की है।

मिर्जापुर कुलियां के कुलदीप ने आरोप लगाया कि उनका एक पुलिसकर्मी के साथ झगड़ा हो गया था।  खुनस निकालने के लिए उस पर सुजानपुर पुलिस ने नशा तस्करी का मामला दर्ज किया है। इस बारे में पूछने पर पुलिस कप्तान (हेडक्वार्टर) नरेंदर बेदी ने कहा कि सारे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन-जिन पुलिस थानों से संबंधित उक्त केस हैं, वहां जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।

ड्रिप और ऑक्सीजन लगाने से किया मना
तीन दिन से भूखहड़ताल पर चल रहे विचाराधीन कैदियों ने तबीयत खराब होने के बावजूद ड्रिप और ऑक्सीजन लगाने से मना कर दिया। इस बीच डॉक्टरों और सेहत मुलाजिमों ने उन्हें जबरदस्ती ड्रिप और ऑक्सीजन लगाई। कैदियों ने रोते हुए अपने ऊपर पुलिस के अत्याचारों के दास्तां सुनाई।

हेरोइन एक्सपर्ट इंस्पेक्टर फिर सुर्खियों में
हेरोइन पकड़ने में किंग जिला पुलिस के सस्पेंड इंस्पेक्टर ललित कुमार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं। सिविल अस्पताल में भर्ती विचाराधीन कैदी जुगियाल के राजेश शर्मा के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके बेटे पर 550 ग्राम नशीले पाउडर का पर्चा डाला गया जबकि उनका बेटा जुगियाल में मेडिकल स्टोर चलाता है। उन्होंने कहा कि सदर पुलिस के तत्कालीन इंचार्ज इंस्पेक्टर ललित ने उसे घर से बुलाकर झूठे मामले में फंसाया। बाद में नशीले पाउडर का सैंपल फेल कराने के लिए चार लाख की मांग की, जो उनके जेब से देना नामुमकिन था।
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