जिंदगी के पहले पड़ाव से ही रास्ता भटक कर नशे की गिरफ्त में आए 14 साल के बच्चे को बटाला के नशा मुक्ति केेंद्र ने नई जिंदगी दी है। 11 साल की उम्र से ही नशे की दलदल में फंसा ये मासूम अब 14 साल का हो चुका है।
वह सीमावर्ती गांव आवान का रहने वाला है। इन तीन सालों में नशे ने उसे शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से कमजोर कर दिया है। नशे से छुटकारा दिलाने के लिए पहले उसे डेरा बाबा नानक ले जाया गया था।
बाद में उसके परिजनों ने उसे बटाला के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती करवा दिया। आज वह नशे पर पूरी तरह लगाम कसने और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात करता है।
उसने बताया कि तीन साल पहले उसके कुछ रिश्तेदारों और गांव के कुछ लोगों ने उसे हेरोइन के नशे का आदी बना दिया था। तब वह चौथी कक्षा में पढ़ाता था। छठी कक्षा में उसने पढ़ाई दी। उसने बताया कि उनका गांव सीमा पर है और वहां के बहुत सारे युवक हेरोइन पीने के आदी हैं।
वह इस नशे की लत से छुटकारा पाना चाहता है। वह अन्य बच्चों की तरह पढ़ाई करके अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है। उसने दृढ़ता से कहा कि वह नशे से मुक्ति पाकर ही रहेगा।
नशा मुक्ति केंद्र बटाला के इंचार्ज डॉ. बरिंदर सिंह ने बताया कि जब यह बच्चा यहां आया था तो उसकी हालत बहुत खराब थी। अब वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। वह इलाज करने में डॉक्टरों की टीम को भी पूरा सहयोग दे रहा है।