वैसे तो पठानकोट शहर राज्य के ए क्लास शहरों की सूची में है लेकिन शहर की सड़कों की हालत देखकर इस शहर को ए क्लास का दर्जा देना सही नहीं है।
शहर की प्रत्येक सड़क पर गहरे गड्ढे पड़े हैं जिन पर वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। प्रदेश के इस ए क्लास शहर की सड़कों की हालत थर्ड क्लास शहरों की सड़कों से भी ज्यादा खराब है। शहर की सड़कों को चंडीगढ़ की तर्ज पर बनाए जाने के तमाम चुनावी वादे टूटते नजर आ रहे हैं।
शहर की सड़कों का नवनिर्माण तो दूर की बात इन सड़कों की मरम्मत तक नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
शहर के ढांगू रोड, ढाकी रोड, गुरदासपुर रोड, पटेल चौक, जालंधर-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग बाईपास, सैली रोड, रेलवे रोड, मिशन रोड पर लगभग पांच किलोमीटर लंबी सड़कों पर 500 सौ से ज्यादा गड्ढे हैं।
एमसीपी बता रहा फंड की कमी
हालांकि, शहर के विकास के लिए राज्य ने पठानकोट की नगर काउंसिल को अपग्रेड कर इसे म्यूनिसिपल कारपोरेशन का दर्जा दिया था। बावजूद इसके शहर की सड़कों की हालत नहीं सुधरी।
नगर निगम के अधिकारी शहर की सड़कों की मरम्मत न करवाए जाने का कारण नगर निगम को राज्य सरकार की ओर से फंड जारी न होना बता रहे हैं।
फंड की कमी का रोना रो रही नगर निगम को गठित हुए दो साल हो चुके हैं, लेकिन राज्य सरकार ने फंड के नाम पर इस नगर निगम को एक फुटी कौड़ी भी नहीं दी है जिससे सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
रैलियों के दौरान होती खानापूर्ति
नगर निगम की ओर से महज किसी बड़ी राजनीतिक रैली के दौरान सड़कों की हालत संवारने की खानापूर्ति की जाती है। पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की रैली के दौरान शहर की सैली रोड पर पैच वर्क किया गया था लेकिन यह पैच वर्क कुछ समय बाद ही उखड़ गया।
नगर निगम और सत्तासीन सरकार के स्थानीय नेता महज किसी बड़ी रैली के दौरान ही सड़कों की दशा को सुधारने की बात सोचते है जिससे शहर की जनता में रोष बढ़ता जा रहा है।
हकीकत से परे मात्र दावे
सड़कों की हालत पर पठानकोट के विधायक अश्विनी शर्मा ने कहा कि जल्द ही शहर की सड़कों के लिए राज्य सरकार से म्यूनिसिपल कारपोरेशन को फंड मुहैया करवाए जाएगा। जब उनसे पूछा गया कि अब तक फंड जारी क्यों नहीं तो उन्होंने इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने शहर की सड़कों की दशा जल्द सुधारने का दावा किया।