पठानकोट। हिमाचल प्रदेश की निजी बसें पंजाब के राजस्व को चूना लगा रही हैं। पठानकोट में सारा खेल मिलीभगत से चल रहा है। हर महीने पंजाब सरकार को प्रति बस 5700 रुपये के रोड टैक्स की चपत लग रही है। वहीं हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) ने अपनी सीमा में बाकायदा नाके लगाकर अवैध रूप से चलने वाली बसों को रोकना शुरू कर दिया है। इससे हिमाचल के राजस्व में पठानकोट से रोजाना डेढ़ लाख की बढ़ोतरी हुई है, जबकि निगम की ओर से पठानकोट के जिला प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस को अवैध रूप से चलने वाली बसों को रोकने की सिफारिश भी की है।
जानकारी के मुताबिक पंजाब से पठानकोट के रास्ते हिमाचल को बसों के 119 फेरे हैं। इनमें केवल 14 फेरे ही प्राइवेट बस आपरेटरों के पास हैं, जबकि बाकी सरकारी बस सेवा है। लेकिन, नियमों को दरकिनार कर प्राइवेट बस आपरेटर पंजाब के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। हिमाचल से आने वाली प्रत्येक निजी बस का पंजाब को 5700 रुपये रोड टैक्स बनता है जो निजी बस आपरेटर मिलीभगत कर देते नहीं हैं। निजी बसों को रोकने के लिए विभाग और पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इससे अवैध बस परिचालन से एचआरटीसी को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसलिए एचआरटीसी की ओर से उन्हें रोकने के लिए कंडवाल और शहर के बीच हिमाचली क्षेत्र ढांगू पीर में नाका लगाकर 10 दिन में अवैध रूप से चलने वाली 15 बसों को रोका है। दरअसल, हिमाचल रीजन ट्रांसपोर्ट विभाग की ओर से धर्मशाला कांगड़ा, नूरपुर, जसूर वाया कंडवाल-लोधवा के रास्ते पठानकोट के चक्की पुल (हिमाचली क्षेत्र ढांगू पीर) के परमिट जारी किए गए हैं। जबकि कंडवाल-लोधवा के रास्ते जाने के बजाय निजी बसें बिना टैक्स दिए पंजाब के चक्की पड़ाव, हरियाल, ममून के रास्ते सीधे पठानकोट बस अड्डा तक जा रही हैं। मालूम हो कि प्रत्येक बस से मासिक 3.70 पैसे प्रति पैसेंजर के हिसाब के रोड टैक्स पंजाब को देना होता है जो 5700 रुपये प्रति बस बनता है, लेकिन सरकारी खजाने में पैसा जमा नहीं हो रहा है और प्राइवेट बस आपरेटर सवारियां भरकर चांदी कूट रहे हैं।