पठानकोट। स्थानीय सिविल अस्पताल में एक साथ कई डाक्टरों के छुट्टी पर चले जाने से ओपीडी में आने वाले मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। दरअसल कैजुअल लीव का कोई पैसा नहीं मिलने अस्पताल के कई डाक्टर साल भर मिलने वाली छुट्टियां पूरी करने के लिए चले गए हैं जबकि कई डाक्टर सरकारी ड्यूटी में शामिल होने चले गए।
जानकारी के मुताबिक सिविल अस्पताल में एसएमओ सहित कुछ मिलाकर 20 डाक्टरों हैं। उनमें से एसएमओ समेत सात डाक्टर साल भर मिलने वाली केजुअल लीव को खत्म करने के लिए छुट्टी पर चले गए हैं। जबकि पांच डाक्टरों की आज सरकारी ट्रेनिंग में ड्यूटी थी। पीछे बचे नौ डाक्टरों में एक डाक्टर आपरेशन थिएटर संभालने में लगा रहा। जबकि नियमानुसार दिन में एक-एक डाक्टर की ड्यूटी ट्रामा और इमरजेंसी में लगी है। बाकी छह डाक्टरों के पास लैब, ब्लड बैंक, लेबर रुम, पीपी यूनिट की ड्यूटी है। पीछे से ओपीडी में पूरा दिन ताला लटका रहा और अपने तीमारदारों के साथ चेकअप को आए मरीज इधर उधर डाक्टरों की तलाश में ढूंढते रहे। हैरानीजनक है कि पर्ची काटने वाले भी धड़ाधड़ पर्ची काटते रहे, लेकिन ओपीडी में डाक्टर ही उपलब्ध नहीं था। वहीं एक साथ डाक्टरों के छुट्टी और ट्रेनिंग पर चले जाने और कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से मरीज भी परेशान होते रहे। मरीज राजेश कुमार, भूपिंद्र सिंह, विजय कुमार, कमो देवी, सुलक्षणा कुमारी ने कहा कि यदि अस्पताल में डाक्टर नहीं थे तो उनकी पर्ची काटी जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकारी सस्ते इलाज के चक्कर में आए थे, लेकिन उन्हें डाक्टरों के अगले कई दिन तक छुट्टी पर होने के चलते बाहर से महंगा ईलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
इस बारे में पूछने पर कार्यवाहक एसएमओ डा. सुच्चा राम ने बताया कि अस्पताल में डाक्टर छुट्टी पर थे और कुछ की ट्रेनिंग लगी थी इसलिए ओपीडी की पर्ची काटने से मना किया गया था। उन्होंने कहा कि डाक्टरों की ट्रेनिंग और छुट्टी की वजह से मरीजों को परेशानी हुई है, उसके लिए कल से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
दरअसल, की वजह से दिसंबर माह में ज्यादातर मुलाजिम अपनी छुट्टियां खत्म करने के लिए निकल जाते हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल के डाक्टरों के एक साथ छुट्टियों पर निकल जाने से शुक्रवार को पूरी ओपीडी ही ठप हो गई।