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पंजाब बंद: अमृतसर और होशियारपुर में ही दिखा असर, जालंधर में गुरु पर्व के कारण हिंदू संगठनों ने वापस ली कॉल

Sat, 05 Nov 2022 05:23 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब

सार

अमृतसर रवाना होने से पहले विभिन्न हिंदू संगठनों के नेता जालंधर के बीएमसी चौक पर इकट्ठा हुए, वहां पर सभी ने नारेबाजी की। पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए अमृतसर के पुलिस कमिश्नर अरुण पाल के खिलाफ उनका गुस्सा फूटा। उनकी फोटो लेकर चौक के बीच में जलाई गई। 
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अमृतसर में सुधीर सूरी की हत्या के विरोध में जुटे शिवसेना टकसाली कार्यकर्ता। - फोटो : ANI
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विस्तार
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हिंदू नेता सुधीर सूरी की हत्या के विरोध में हिंदू संगठनों ने शनिवार को पंजाब बंद की कॉल की थी। इस कॉल का असर केवल अमृतसर और होशियारपुर में ही दिखा। बाकी जिलों में बंद बेअसर रहा। वहीं जालंधर में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाशोत्सव को समर्पित नगर कीर्तन के चलते शहर के हिंदू संगठनों ने बंद की कॉल वापस ले ली। हिंदू नेताओं ने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी में उनकी भी आस्था है। वह सभी की भावनाओं की कदर करते हैं। वह यात्रा में कोई विघ्न नहीं डालना चाहते। 

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अमृतसर में हिंदू संगठनों के बंद को  दिया शहरवासियों ने समर्थन
सुधीर सूरी की हत्या के बाद हिंदू संगठनों ने शुक्रवार शाम ही अमृतसर बंद का ऐलान कर दिया था। हिंदू संगठनों शिव सेना (टक्साली), शिव सेना (राष्ट्रवादी), शिव सेना (भारतीय), शिव सेना (सूर्यावंशी) और अखिल भारतीय हिंदू संघर्ष कमेटी के नेताओं ने लोगों से बंद के लिए समर्थन मांगा था। हिंदू संगठनों की बंद की कॉल पर आज शहर के ज्यादातर बाजार और दुकानें बंद ही रहीं। हालांकि कुछ एक जगहों पर आंदोलनकारियों ने बाजारों का चक्कर लगाया और खुली दुकानों को बंद करवा दिया। इस दौरान ही हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं का कुछ युवाओं ने छत पर चढ़कर विरोध किया, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा कर हालात पर काबू पाया।  

जालंधर में फूंका अमृतसर के सीपी का पुतला
वहीं अमृतसर रवाना होने से पहले विभिन्न हिंदू संगठनों के नेता जालंधर के बीएमसी चौक पर इकट्ठा हुए, वहां पर सभी ने नारेबाजी की। पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए अमृतसर के पुलिस कमिश्नर अरुण पाल के खिलाफ उनका गुस्सा फूटा। उनकी फोटो लेकर चौक के बीच में जलाई गई। 
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हिंदू नेताओं का कहना था कि पुलिस कमिश्नर की गलती के कारण हिंदू नेता की हत्या हुई है। शिवसेना नेता इशांत शर्मा ने कहा कि जब शिवसेना टकसाली के प्रधान सुधीर सूरी धरना लगाकर बैठे थे तो उस वक्त वहां पर डीएसपी, एसएचओ के साथ सूरी के गनमैनों समेत करीब पच्चीस से ज्यादा पुलिस वाले मौजूद थे। हत्यारा सभी के सामने आया और गोलियां मारकर भाग गया। पुलिस वाले जवाब में फायर करने के बजाय मौके से भाग गए और बाद में कहा कि हमने आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस की मंशा में ही खोट था और हत्यारे को पकड़ने का दावा भी गलत है। वह कह रहे हैं कि पुलिस ने मौके से हत्यारे को पकड़ लिया जबकि उसे पुलिस ने नहीं बल्कि एक हिंदू भाई राहुल पंडित ने पकड़ा। उन्होंने ही हत्यारे का पीछा किया और उसे दबोचा। उसके बाद पुलिस को बुलाकर उनके हवाले किया। 

उन्होंने कहा कि हैरानी की बात है कि हथियारबंद पुलिस वालों ने एक भी फायर नहीं किया। हिंदू नेता सुनील बंटी, पहलवान व अन्य ने भी मांग की है कि पुलिस वालों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब वक्त आने पर हथियार चलाने ही नहीं है तो फिर यह खिलौने हाथों में पकड़ क्यों रखे हैं। हिंदू नेताओं ने कहा कि सरकार सुधीर सूरी को शहीद का दर्जा दें। वह एक ऐसे नेता थे जिन्होंने देश विरोधी ताकतों के साथ ताउम्र सीधी टक्कर ली।

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लुधियाना में नहीं दिखा बंद का असर 
लुधियाना के सभी बाजार सुबह अपने समय पर खुले। हालांकि पुलिस की तरफ से प्रमुख बाजारों में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। पुलिस को आशंका थी कि हिंदू संगठन सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेगा और बाजार बंद कराने की कोशिश करेंगे, लेकिन हिंदू संगठन सुधीर सूरी के परिवार से मिलने के लिए अमृतसर जाने के लिए अड़े रहे। लेकिन प्रशासन ने उन्हें जाने की इजाजत नहीं दी। उन्हें लुधियाना के बार्डर पर ही रोक लिया गया और वहां से वापिस जाने की अपील की। हालांकि कुछ हिंदू नेता सुधीर सूरी के घर पहुंच गए और वहां परिवार से मुलाकात की। 

हिंदू संगठनों की तरफ से बंद के ऐलान के बाद आशंका थी कि चौड़ा बाजार के साथ साथ महानगर के प्रमुख बाजारों में हिंदू नेता प्रदर्शन करेंगे। जिसको लेकर कमिश्नरेट पुलिस की तरफ से पहले ही तैयारी कर ली गई थी। चौड़ा बाजार और घंटाघर चौक पर पुलिस का सख्त पहरा लगा दिया गया था। इसके अलावा प्रमुख चौक चौराहों पर भी पुलिस तैनात कर दी गई थी। हर थाना प्रभारी को उनके इलाके में रहने वाले हिंदू नेताओं पर नजर रखने के आदेश जारी थी। जैसे ही हिंदू नेता घरों से बाहर निकले तो पुलिस भी सतर्क रही। हालांकि हिंदू नेताओं ने न तो कोई प्रदर्शन किया और न ही कोई बाजार बंद करवाए। 
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