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Chandigarh: पंजाब में जजों के लिए नहीं सरकारी आवास, 60% न्यायाधीश किराए पर रहने को मजबूर, क्या बोला हाईकोर्ट?

Wed, 29 Apr 2026 10:08 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि मोगा, पठानकोट और एसएएस नगर की स्थिति पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने कहा कि सभी जिलों की एक साथ सुनवाई संभव नहीं है इसलिए इन जिलों से शुरुआत की जा रही है।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में न्यायिक अधिकारियों के आवास और अदालतों के बुनियादी ढांचे की कमी पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि राज्य में करीब 60 प्रतिशत जज किराए के मकानों में रह रहे हैं। यहां तक कि कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश भी किराए के घरों में रहने को मजबूर हैं। इस पर हैरानी जताते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से विस्तृत हलफनामा तलब किया है।
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कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति न्यायिक स्वतंत्रता और गरिमा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है। सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि यदि किसी जज का मकान मालिक ही अदालत में याचिकाकर्ता बनकर आ जाए तो स्थिति कितनी असहज हो सकती है। इस दौरान मोहाली की एक घटना का भी जिक्र किया गया जहां जज ग्राउंड फ्लोर पर और मकान मालिक ऊपर की मंजिल पर रहता था।

जमीन और निर्माण में वर्षों की देरी
कोर्ट के समक्ष रखी गई जानकारी के अनुसार कई जिलों में आवासीय सुविधाओं के लिए वर्षों से लंबित मामले हैं। मोगा में 1995 से जजों के लिए आवास की जरूरत बताई जा रही थी लेकिन जमीन 2015 में जाकर अधिग्रहित हुई। मोहाली में न्यायिक अधिकारियों के लिए जमीन आवंटन में करीब 20 साल की देरी हुई। वहीं पठानकोट में चिन्हित जमीन संरक्षित वन क्षेत्र निकलने के कारण मामला अटक गया।
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तीन जिलों से शुरुआत, मांगी स्टेटस रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया है कि मोगा, पठानकोट और एसएएस नगर की स्थिति पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने कहा कि सभी जिलों की एक साथ सुनवाई संभव नहीं है इसलिए इन जिलों से शुरुआत की जा रही है। साथ ही देरी के कारणों को स्पष्ट करते हुए मुख्य सचिव को हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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