2014 में लुधियानवियों को घंटाघर और पुराने शहर से सिविल लाइंस को जोड़ने के लिए एक नए रेलवे ओवरब्रिज की सौगात मिल सकती है।
तमाम चुनौतियों को पार करने के बाद पिछले 16 साल से लक्कड़ पुल पर बन रहे इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अब अंतिम चरण में है। इस पुल के शुरू होने से यातायात की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। निगम प्रशासन का तर्क है कि इस पुल की एक साइड पर यातायात अगले दो माह में और दूसरी साइड पर यातायात अगले पांच से छह माह में शुरू कर दिया जाएगा।
घंटाघर से सिविल लाइंस इलाके को जोड़ते हुए दशकों से लक्कड़ पुल का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन शहर की बढ़ती आबादी एवं ट्रैफिक को देखते हुए कांग्रेस के नेतृत्व में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने लक्कड़ पुल तुड़वा कर रेलवे ओवरब्रिज बनाने का फैसला किया।
1997 में तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री चौ. जगजीत सिंह ने इसका नींव पत्थर रखा। उस वक्त इस प्रोजेक्ट की लागत 13 करोड़ रुपये आंकी गई थी। विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की जगह अकाली-भाजपा सरकार सत्ता में आ गई। बाद में इस पुल के डिजाइन को लेकर विवाद हुआ और इसका निर्माण ठप हो गया।
नवंबर 2009 में दोबारा इस प्रोजेक्ट का डिजाइन तैयार कराया गया और ट्रैफिक को देखते हुए इसे वाई अक्षर के आकार का बनाने का फैसला लिया गया। घंटाघर की तरफ इस पर आने और जाने के लिए दो रास्ते निकालने पर सहमति हुई। नतीजतन प्रोजेक्ट की कीमत बढ़ कर 58 करोड़ रुपये पर आ गई। इसके बाद से लगातार इस पुल का निर्माण चल रहा है।
बार बार इसकी निर्माण अवधि को बढ़ाया गया। इस पुल को लेकर अकाली भाजपा और कांग्रेस के बीच जम कर राजनीति भी हुई। अकाली-भाजपा मंत्रियों ने रेलवे लाइन पर बनने वाले हिस्से में हो रही देरी के लिए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एवं स्थानीय सांसद मनीष तिवारी पर आरोप मढ़े। जबकि तिवारी ने देरी के लिए अकाली भाजपा को कटघरे में खड़ा किया।
नगर निगम के कमिश्नर का कहना है कि रेलवे ओवर ब्रिज पर एक हिस्से पर यातायात फरवरी तक शुरू कर दिया जाएगा और दूसरे हिस्से को भी पांच माह तक खोल दिया जाएगा। इसका निर्माण तेजी से चल रहा है।