शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की सीनियर नेता हरसिमरत कौर बादल ने कहा है कि पंजाब, राजस्थान और हरियाणा सहित अन्य राज्यों के बीच सभी जल समझौतों की उसी तरह समीक्षा रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार की जानी चाहिए।
हरसिमरत कौर ने संसद के बजट सत्र की पूर्व संध्या पर सर्वदलीय मीटिंग में सिंधू जल समझौते पर अपने विचार रखते हुए कहा कि एसवाईएल समझौते को भी रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि पहले की कांग्रेस सरकार ने पंजाब को मजबूर किया था कि वह हरियाणा को पानी दे।
पंजाबी नदियों के पानी की सुरक्षा के लिए आम आदमी पार्टी पर भरोसा नहीं करते हैं क्योंकि आप के संयोजक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऑन रिकॉर्ड पंजाब के दरिया का पानी हरियाणा और दिल्ली में छोड़े जाने की मांग की थी।
हरसिमरत बादल ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन हटाए जाने के बाद गठित एमएसपी कमेटी का पुनर्गठन करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भरोसा दिलाया गया था कि एमएसपी कमेटी में किसान आंदोलन के प्रतिनिधियों के अलावा प्रमुख किसान और विशेषज्ञ शामिल होंगे लेकिन वर्तमान कमेटी सरकारी प्रतिनिधियों से भरी हुई है और इसमें पंजाब सरकार या पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का कोई भी प्रतिनिधि नहीं है।
डेरामुखी को बार-बार पैरोल से बिगड़ रहा माहौल
हरसिमरत बादल ने सर्वदलीय बैठक में कहा कि दुष्कर्म के दोषी गुरमीत राम रहीम को सत्ता पक्ष द्वारा बार-बार पैरोल दिए जाने से क्षेत्र में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सबके लिए एक जैसा कानून होना चाहिए। जिस तरह से दुराचारियों और हत्यारों को पैरोल और छूट दी जा रही है, वह निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि सिख समुदाय इस बात से आहत है कि यह सब हो रहा है लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2019 में श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर सभी सिख बंदियों को आजाद करने के लिए किए गए वादे को अब तक पूरा नहीं किया गया है।