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मोहाली: किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ महिलाओं को उठानी चाहिए आवाज

Wed, 15 Feb 2023 01:53 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
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किसी भी तरह के शोषण के खिलाफ महिलाओं को उठानी चाहिए आवाज
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जीरकपुर में वीआईपी रोड पर वुमन वेलफेसर एसोसिएशन ने अमर उजाला के कार्यक्रम में साझा किए विचार

संवाद न्यूज एजेंसी
जीरकपुर। शोषण किसी भी तरह का हो, शोषण तो शोषण ही है, किसी भी महिला को अपने साथ होने वाले किसी भी तहर के शोषण के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। अगर शोषण के खिलाफ आवाज न उठाई जाए तो वह दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जाता है और एक दिन वह खुद के लिए नासूर बन जाता है। यह कहना है वीआईपी रोड पर वुमन वेलफेयर एसोसिएशन की सदस्यों का। इस एसोसिएशन की सदस्यों ने अमर उजाला की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में शिरकत करके अपने विचार साझा किए। इस मौके पर कविता शेट्टी, राखी कुकरेजा, दीपिका चलना, दीक्षा, रोमिका ककड़, कोमल भाटिया, इंदु गुप्ता और शिवानी ने बताया कि केवल दुष्कर्म ही शोषण नहीं होता। कामकाजी महिलाओं के साथ तो उनके दफ्तर और कार्य स्थल पर रोजाना होने वाली छेड़छाड़ या कमेंट करना भी एक तरह से शोषण ही होता है। इस कारण महिलाएं कई बार इतनी प्रताड़ित हो जाती हैं कि उन्हें कामकाज भी छोड़ना पड़ता है और उनकी जिंदगी तक बदल जाती है। इसके खिलाफ महिला समाज को आवाज उठानी चाहिए, क्या यह समाज उनका नहीं है। आजकल महिलाएं हर फील्ड में आगे हैं तो अपनी आवाज भी उनको खुद बनना पड़ेगा। इसके लिए महिलाओं को एक जुट होना पड़ेगा, यदि किसी महिला का शोषण होता है तो दूसरी महिलाओं को उनके हक में खड़े होकर लड़ाई लड़नी चाहिए। वहीं उन्होंने कहा की दुष्कर्म की धाराओं जैसे शोषण जैसे अपराधों पर भी सख्त कानून होना चाहिए ताकि महिलाएं भी गर्व से सर उठाकर अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

समाज बनाने में महिला का बड़ा हाथ
कहते है कि महिला के बिना घर नहीं चलता, ऐसा कोई रिश्ता समाज में नहीं जो महिलाओं के बिना चल सके। तो फिर महिलाओं पर अत्याचार क्यों किया जाता है। क्यों उन्हें अपनी इच्छा से नहीं जीने दिया जाता। जबकि समाज को बनाने में सबसे बड़ा हाथ महिला का ही होता है। -रोमिका कक्कड़, निवासी वीआईपी रोड जीरकपुर।
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शोषण झेलना बड़ी गलती
घर से लेकर दफ्तर तक महिलाओं को शोषण झेलना पड़ता है। इसमें गलती उन्हीं महिलाओं की होती है, जो यह शोषण झेलती हैं। यदि कोई महिला अपने लिए आवाज नहीं उठा सकती तो दूसरा उसके लिए आवाज कैसे उठाएगा। सबसे पहले हमें अपनी आवाज बनना होगा, तभी हम किसी की आवाज बन सकती हैं। -कोमल भाटिया, निवासी जीरकपुर।

पुरुष भी सोच बदलें
हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिलाओं को पैर की जूती समझा जाए। अब समय बदल गया है और महिलाएं हर फील्ड में पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चलती है। इसलिए पुरुषों को भी अपनी सोच बदलनी होगी। बहन-बेटी के साथ कोई शोषण होता है तो सबका दर्द एक सो होता है। -इंदु गुप्ता, निवासी वीआईपी रोड।
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गरिमा नहीं गिरानी चाहिए
किसी भी इंसान का शोषण करना बहुत बुरी बात है वह भले ही पुरुष हो या महिला, सबको एक समान अपनी इच्छा से जीने का हक है। आजकल दुष्कर्म के बहुत से झूठे केस भी आते है, उन महिलाओं काे भी शर्म करनी चाहिए जो पैसे या किसी लालच के लिए अपनी गरिमा को गिरा देती है। यह निर्दोष पुरुषों के लिए भी एक शोषण ही है। -शिवानी, निवासी जीरकपुर।
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