जीरकपुर। शहर में सामुदायिक केंद्रों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा है, जिनमें से कुछ सामुदायिक केंद्र अलग-अलग कार्यों के लिए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। जैसे कि दो सामुदायिक केंद्रों में से एक में पहलवानी अखाड़ा चल रहा है और दो-तीन सामुदायिक केंद्रों में स्वास्थ्य केंद्र भी चलाए जा रहे हैं। इनके अलावा कुछ सामुदायिक केंद्र ऐसे भी हैं जिनकी हालत खस्ता हुई पड़ी है और वह नगर परिषद के अधिकारियों की सीधी नजर का इंतजार कर रहे हैं।
नगर परिषद के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार खाली पड़े सामुदायिक केंद्र अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए बुक किए जाते हैं। अगर किसी ने किसी पारिवारिक सदस्य की मृत्यु होने के बाद उसका भोग का कार्यक्रम करना हो तो उसके लिए 1020 रुपये फीस रखी हुई है और अगर किसी ने अपने परिवार का कोई खुशी का कार्यक्रम आयोजित करना हो तो उसके लिए 6080 रुपये फीस रखी गई है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में इन सामुदायिक केंद्रों में से कुल 91438 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है जो के नाम मात्र ही है।
शहर निवासियों का कहना है कि अगर शहर के सामुदायिक केंद्रों की मरम्मत करवाकर और उसमें सफेदी करवाकर उनकी हालत को ठीक कर दिया जाए तो नगर परिषद जीरकपुर को इनमें से लाखों रुपये राजस्व के रूप में प्राप्त हो सकता है, क्योंकि जरूरतमंद और मध्य वर्ग परिवारों को मजबूरी में महंगे मैरिज पैलेस शादी के लिए बुक करने पड़ते हैं। जिससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ पड़ता है ।
शहर निवासियों ने की मरम्मत की मांग
शहर के लोगों की ओर से समय-समय पर नगर परिषद के अधिकारियों को इन सामुदायिक केंद्रों की मरम्मत के लिए पत्र भी लिखा जा चुके हैं जैसे कि वार्ड नंबर 3 में स्थित सैनी विहार फेस 2 में बने हुए सामुदायिक केंद्र की मरम्मत के लिए करीब 15 दिन पहले वार्ड पार्षद आरती शर्मा द्वारा भी पत्र लिखा जा चुका है। दूसरी और गांव सनौली में बने हुए सामुदायिक केंद्रों की हालत इतनी खस्ता है कि अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद भी उसे सामुदायिक केेंद्र में भेड़ बकरियां ही आराम करती नजर आती है और उन्हें वहां से निकाला नहीं जा रहा। अगर उस सामुदायिक केेंद्र की हालत में सुधार कर दिया जाए तो गांव का एकमात्र सामुदायिक केेंद्र नगर परिषद के लिए एक बड़ी कमाई का साधन बन सकता है। लोगों द्वारा मांग की जा रही है कि शहर में बने सामुदायिक केेंद्र लोगों की सुविधा के लिए होते हैं लेकिन खस्ता हालात के चलते उनका कोई फायदा नहीं हो रहा है, तो उन्हें जल्द से जल्द मरम्मत कर सुंदर बना दिया जाए ताकि लोग इन सामुदायिक केेंद्तों को इस्तेमाल में ला सके।
टूटे पड़े खिड़की के शीशे
पिछले काफी समय से हम सामुदायिक केेंद्र की खिड़की के टूटे हुए शीशे, उसकी मरम्मत के लिए नगर परिषद को शिकायतें कर रहे हैं परंतु नगर परिषद हमारी शिकायतों को बिल्कुल अनदेखा कर रहा है और सामुदायिक केेंद्र की हालत दिन प्रतिदिन खस्ता होती जा रही है। जबकि इन सामुदायिक केेंद्र से नगर परिषद जीरकपुर को राजस्व की प्राप्ति भी हो रही है तो इनका रखरखाव सही तरीके से क्यों नहीं किया जा रहा। -प्रवीण शर्मा, समाजसेवी बलटाना
क्या परिषद के पास पैसे नहीं हैं
सामुदायिक केंद्र के रखरखाव संबंधी शिकायतें पिछले एक साल से नगर परिषद को लिखकर दी जा चुकी हैं, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी इस तरफ कोई भी ध्यान नहीं दे रहे। टैक्स के रूप में करोड़ों रुपये इकट्ठा करने वाली नगर परिषद जीरकपुर के पास क्या सामुदायिक केंद्रों के रखरखाव के लिए पैसे नहीं हैं। अधिकारियों को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए कम्यूनिटी सेंटरों की रखरखाव सही तरीके से करनी चाहिए। -ओम प्रकाश, निवासी सैनी विहार फेस 3 बलटाना।
कोट्स
जल्द ही उन्हें सभी सामुदायिक केंद्रों की सूची के साथ एक पत्र लिखकर सभी सामुदायिक केंद्रों की मरम्मत के लिए लिखा जाएगा। सभी सामुदायिक केंद्रों का सर्वे कर लिया गया है और सभी की रिपोर्ट इस सप्ताह में बनाकर इंजीनियरिंग ब्रांच को भेज दी जाएगी। इसके बाद इंजीनियरिंग ब्रांच की तरफ से एस्टीमेट बनाया जाएगा और मरम्मत का काम करवाया जाएगा। -अशोक कुमार, इंस्पेक्टर नगर परिषद जीरकपुर