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करोड़ों से बना अति आधुनिक एसी बस स्टैंड हो रहा खंडहर, लोगों को नहीं मिल रहा फायदा

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मोहाली। शहर के फेज-6 में करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया अति आधुनिक अंतरराज्यीय बाबा बंदा सिंह बहादुर एसी बस टर्मिनल उचित देखभाल न होने से खंडहर होता जा रहा है। कोरोना काल में जब चंडीगढ़ ने बाहरी राज्यों के वाहनों की एंट्री रोकी तो उसमें पंजाब रोडवेज की बसें रुकनी शुरू हो गई थीं। लेकिन स्थानीय लोग इसका फायदा फिर भी नहीं उठा पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह शहर से बाहर बनाया गया है।
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वहीं, बस स्टैंड का मामला अदालत में होने के कारण सरकार भी इसका इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं कर पा रही है। हालांकि जिला प्रशासन ने बस स्टैंड के नए विकल्प पर काम शुरू कर दिया है।
पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने चंडीगढ़-खरड़ हाईवे पर फेज-6 में अति आधुनिक बस स्टैंड बनाया था। दावा था कि इस बस स्टैंड में मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग मॉल समेत कई सुविधाएं रहेंगी। इसकी छत पर विदेशों की तर्ज पर हैलीपैड बनाया जाएगा, जिस पर हेलीकॉप्टर तक उतर पाएंगे। लेकिन सपना साकार नहीं हो पाया।
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बस स्टैंड शहर से बाहर बना होने के कारण लोग इसके विरोध में थे। पिछले चुनाव से ठीक पहले सरकार ने 16 दिसंबर, 2016 में आधे अधूरे बस स्टैंड को शुरू कर दिया था, लेकिन जैसे ही सरकार बदली तो बस स्टैंड शहरी राजनीति का शिकार हो गया। स्थानीय निजी बस चालक तो इसमें जाते तक नहीं हैं। बस ऑपरेटर फेज-8 से अपनी सर्विस चलाते हैं, जबकि पुराना बस स्टैंड तोड़ दिया गया है। फेज-8 शहर के अंदर होने के चलते लोग मजबूरी में धूप बारिश में उसी एरिया से बस पकड़ लेते हैं। इससे लोगों को फायदा है कि उन्हें ऑटो या अन्य कैब वाले को पैसे नहीं देने पड़ते। वहीं, सभी सरकारी दफ्तर भी इसी इलाके में हैं। जबकि नया अंतरराज्यीय टर्मिनल बस स्टैंड केवल सेल्फी प्वाइंट बनकर रख गया है। अब हालात यह हैं कि इसका इस्तेमाल न होने और देखरेख के अभाव में यह खंडहर बनता जा रहा है।
करोड़ों का निवेश करने वालों के सपने हवा में
बस स्टैंड का यह प्रोजेक्ट करीब 350 करोड़ रुपये का है। सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर सरकार ने इसे बनाया था। इस बस स्टैंड की सुविधाओं के सपने दिखाकर इसे बनाने वाली कंपनी ने देश विदेशों में जाकर सेमिनार और कार्यक्रम किए। कई लोगों ने करोड़ों का निवेश किया। निवेशकों ने 35 से 90 फीसदी तक भुगतान किया है। निवेशकों को 2012 में ही कब्जा देने का वादा हुआ था, लेकिन हुआ इसके उलट। निवेश करने के बाद भी लोगों को न तो उनका मुनाफा मिला और न ही किसी साइट का कब्जा। क्योंकि बिजनेस टावर बन ही नहीं पाए। कंपनी के पांच निदेशकों पर केस दर्ज हो चुका है। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी तक हो चुकी है।
प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं मिला, अस्पताल भी नहीं बना पाए
नगर निगम को बस स्टैंड से लाखों रुपये की आमदनी होनी थी, लेकिन 15 लाख रुपये से अधिक का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया चल रहा है। आने वाले समय में यह रकम और बढ़ेगी। वहीं, नगर निगम के अधिकारियों के सामने दुविधा यह है कि प्रॉपर्टी टैक्स कैसे वसूलें। कोरोना काल में राज्य सरकार ने योजना बनाई थी कि उक्त साइट को कोविड केयर सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाए, लेकिन मामला अदालत में होने के चलते यह भी काम सफल नहीं हो पाया।
सेक्टर-78 में नया बस स्टैंड बनाने की तैयारी
अब नए सेक्टरों में बस स्टैंड बनाने की तैयारी है। विधायक एवं सेहत मंत्री बलबीर सिंह इस प्रोजेक्ट को खुद देख रहे है। उनकी कोशिश यह है कि सेक्टर-78 में बस स्टैंड स्थापित किया जाए, जिससे नए और पुराने शहर को फायदा मिल पाए। वहीं, बस स्टैड शहर से बाहर होगा तो अंदरूनी सड़कों पर वाहनों का अधिक दबाव नहीं रहेगा। सड़क हादसे भी कम होंगे
एक नजर में प्रोजेक्ट
बस स्टैंड का यह प्रोजेक्ट 2009 में शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2011 में पूरा किया जाना था। सात एकड़ में प्रोजेक्ट स्थापित किया जाना था। इसमें एक अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, तीन मल्टी स्टोरी टावर, मल्टीप्लेक्स, पांच सितारा होटल शामिल है। बैंक्वेट हॉल, हाइपर मार्केट और टावर के ऊपर एक हैलीपैड बनना था, लेकिन अपनी स्थापना के बाद से यह परियोजना विवादों और कब्जे में देरी से घिरी हुई है। जबकि बस टर्मिनल चालू हो गया है।
सरकार को भेजेंगे फाइल तैयार करके
जहां तक बस स्टैंड से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने की बात है। इसके लिए बाकायदा फाइल तैयार करके सरकार को भेजी जाएगी। सरकार के निर्देश पर कार्रवाई की जाएगी। दूसरा नया बस स्टैंड बनाने के लिए जगह की निशानदेही का काम चल रहा है। सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू खुद इस मामले को लेकर गमाडा के साथ बातचीत कर रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही लोगों को नए बस स्टैंड का फायदा मिलेगा।
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- कुलजीत सिंह बेदी, डिप्टी मेयर, नगर निगम मोहाली
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