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रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों ठगने वाले दो शातिर गिरफ्तार, आरोपी डीआरएम अंबाला के साथ स्टेनोग्राफर के पद पर कर चुका काम

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मोहाली। रेलवे का जाली चेयरमैन और अधिकारी बनकर लोगों को रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रुपये ठगने वाले दो शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी इतने शातिर हैं कि वह पंचकूला जिले के पिंजौर स्थित अपने एक कंप्यूटर सेंटर से ही सभी जाली दस्तावेज तैयार करते थे। यहीं से तैयार करके लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र और वर्दियां तक सौंप देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गौतम कुमार उर्फ राजपूत मूल निवासी हरमिलाप नगर, बलटाना, जीरकपुर और हाल निवासी मॉडर्न वैली मोरिंडा रोड, खरड़ और चुन्नी लाल निवासी रतपुल कॉलोनी पिंजौर, जिला पंचकूला, हरियाणा के रूप में हुई है। यह आरोपी युुवाओं से लाखों रुपये लेकर रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में इंस्पेक्टर, एसआई और एएसआई पद पर नौकरी दिलवाने का झांसा देकर ठगते थे। इन्होंने पंजाब, हरियाणा और यूपी के लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। एसएपसी मोहाली सतिंदर सिंह ने बताया कि थाना सिटी खरड़ में आरोपियों पर धोखाधड़ी करने, जाली सरकारी दस्तावेज तैयार करने समेत अन्य आठ धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
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जानकारी के मुताबिक हरजिंदर सिंह निवासी गूनोमाजरा थाना ब्लॉक माजरी से आरोपियों ने साढ़े चार लाख रुपये रेवले प्रोटेक्शन फोर्स में एएसआई रैंक पर नौकरी दिलवाने के नाम पर लिए थे। इसके बाद उसे जाली ज्वाइनिंग लैटर देकर खुद ही सिलाई हुई वर्दी दिखाकर उसे लुभाते रहते थे। इसी तरह हरिओम निवासी आगरा, यूपी से एसआई रैंक पर भर्ती करवाने के लिए साढ़े चार लाख रुपये वसूले थे। लेकिन जब उन्होंने पड़ताल की तो दोनों की पोल खुल गई
पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी युवाओं को ठगी का शिकार बनाते हैं। इसके बाद एसपी जांच हरमनदीप सिंह और डीएसपी जांच गुरचरण सिंह की अगुवाई में पुलिस की टीम ने मामले की पड़ताल की। इसके बाद आरोपी गौतम कुमार को खरड़ में मॉर्डन वैली से कार समेत दबोचा। जबकि उसके साथी चुन्नी लाल को छापा मारकर प्राइम कंप्यूटर सेंटर पिंजौर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि गौतम कुमार उर्फ राजपूत पहले अंबाला कैंट में रेलवे विभाग में डीआरएम के साथ ठेके पर स्टेनोग्राफर के पद पर काम करता था। इसलिए उसे रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में युवाओं की भर्ती कैसे होती है, इसकी पूरी जानकारी थी। जबकि चुन्नी लाल 1999 से पिंजौर में प्राइम कंप्यूटर सेंटर चला रहा था। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी रेलवे स्टेशनों पर ठेके पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को भी नौकरी दिलवाते थे। इन्होंने गुरदेव कुमार, लक्ष्मण, प्रदीप निवासी आगरा, यूपी, मनीष निवासी अमृतसर से 25-25 हजार रुपये लिए थे। इनका एक और साथी हिमांशु जो कि एक रेलवे में पांच साल के लिए ठेकेदार था। उसके साथ मिलकर युवाओं को पांच साल के लिए जाली ज्वाइनिंग लैटर देते थे। इन लोगों से रेलवे स्टेशन पर दो महीने ढुलाई का काम करवाकर उन्हें अपने स्तर पर वेतन देते थे
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यह सामान हुआ बरामद
वहीं, गौतम कुमार उर्फ राजपूत युवाओं से 15-15 हजार रुपये कमीशन के रूप में लेता था। इतना ही नहीं आरोपियों से जो चंडीगढ़ नंबर की एंडेवर कार बरामद हुई है। उसके बोनट पर भी अंग्रेजी में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया लिखा हुआ था। साथ ही चेयरमैन दिल्ली बोर्ड की प्लेट लगाई हुई थी। पुलिस ने आरोपियों से आरपीएफ के इंस्पेक्टर, एएसआई, एसआई और अन्य रैंकों की वर्दियां, कंप्यूटर-प्रिंटर, आरपीएफ में भर्ती करवाने के लिए तैैयार किए गए जाली दस्तावेज की फाइल और डमी रिवाल्वर, खाकी कवर, छह नकली कारतूस बरामद किए हैं।
ऐसे तैयार करते थे जाली दस्तावेज
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी पिंजौर में कंप्यूटर सेंटर में ही रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की भरती के जाली नोटिफिकेशन, सिलेबस, फिजिकल टेस्ट, मेडिकल टेस्ट और ज्वाइनिंग लेटर के साथ आईडी कार्ड तक तैैयार करते थे। इसके बाद आईडी कार्ड पर आरपीएफ भारतीय रेलवे का जाली लोगो, जाली मुहर लगाकर स्कैन करके दस्तावेज तैयार कर लेते थे। इतना ही नहीं मेडिकल आदि लिए 25 हजार रुपये अलग से वसूलते थे।
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