मोहाली। चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र के लिए पंजाब सरकार के 1,220 करोड़ रुपये के बजट का सीधा लाभ अब लीवर और पित्त रोगों से जूझ रहे मरीजों को मिलेगा। मोहाली स्थित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पीआईएलबीएस) में विस्तार का काम शुरू हो गया है। यहां 175 बेड की अतिरिक्त सुविधा और डायग्नोस्टिक ब्लॉक विकसित किया जा रहा है। इससे अस्पताल की क्षमता मौजूदा 60 बेड से बढ़कर करीब 235 बेड तक पहुंच जाएगी।
वर्तमान में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल जैसे पड़ोसी राज्यों से रोजाना 70 से 80 गंभीर मरीज अपनी जान बचाने के लिए यहां पहुंचते हैं। अभी केवल 60 बेड होने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी दबाव का सामना करना पड़ता है। बजट में लीवर इंस्टीट्यूट में बेड बढ़ाने और ब्लाॅक का विस्तार करने की घोषणा के कारण मरीजों को लाैटना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा उनको इलाज के लिए दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों की दौड़ लगानी पड़ेगी।
डायग्नोस्टिक ब्लॉक का जल्द होगा विस्तार
इलाज में सबसे बड़ी बाधा जांच की होती है। डायग्नोस्टिक ब्लॉक के लिए सरकार ने अलग से पूरा खर्च दिया है, जिससे मरीजों को बाहरी निजी लैबों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यहां एक माह के अंतराल पर सीटी स्कैन की सुविधा शुरू हो जाएगी। एमआरआई मशीन का ऑर्डर दिया जा चुका है, अगले चार माह में यह सेवा भी सक्रिय हो जाएगी। यहां लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा है, अब एडवांस स्वास्थ्य सेवाओं के तहत गरीब मरीजों के लिए यह सेवा राहत देगी।
डेढ़ साल बाद बदलेगी तस्वीर
भले ही अत्याधुनिक बिल्डिंग के निर्माण में 1 से 1.5 साल का समय लगेगा, लेकिन मरीजों को सुविधाएं चरणों में मिलनी शुरू हो जाएंगी। संस्थान के डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र सिंह बताते हैं कि हमारा ध्येय केवल इलाज करना नहीं, बल्कि रिसर्च को भी बढ़ावा देना है। मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए विकसित की जा रही लैब और रिसर्च सुविधाएं भविष्य में उन बीमारियों के इलाज का रास्ता भी साफ करेंगी, जिन्हें अब तक लाइलाज माना जाता रहा है।
सरकार ने डायग्नोस्टिक ब्लॉक और बेड विस्तार के लिए फंड की बाधाएं खत्म कर दी हैं। हमारा लक्ष्य मरीजों को केवल बेड देना नहीं, बल्कि उन्हें विश्वस्तरीय तकनीक और लिवर ट्रांसप्लांट जैसी सेवाएं किफायती दर पर उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में यह संस्थान उत्तर भारत में लिवर के इलाज का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा। - डॉ. विरेंद्र सिंह, डायरेक्टर, पीआईएलबीएस
मरीजों को क्या होगा फायदा?
एक छत के नीचे समाधान : टेस्ट (सीटी/एमआरआई) से लेकर ट्रांसप्लांट तक सब यहीं उपलब्ध होगा।
इलाज में तेजी : बेड क्षमता 235 होने से भर्ती होने के लिए लंबी वेटिंग नहीं करनी पड़ेगी।
आर्थिक बचत : निजी अस्पतालों की तुलना में सरकारी संस्थान में इलाज का खर्च बेहद कम होगा।