-पुलिस पार्टी पर गोलियां चलाने के आरोप में इरादा कत्ल की धाराओं का कर रहे थे सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। पुलिस कर्मी पर फायरिंग कर उसकी हत्या के प्रयास मामले में जिला अदालत ने तीन आरोपियों को सबूतों केे अभाव में बरी कर दिया। हत्या के प्रयास का मामला 31 वर्षीय सुखदीप कुमार उर्फ दीप निवासी जींद हरियाणा, 28 वर्षीय रमन कुमार निवासी दसलेरा जिला बिलासपुर हिमाचल व 33 वर्षीय गुरप्रीत सिंह निवासी सिनौर पटियाला पर वर्ष 2019 में बलौंगी थाने में दर्ज हुआ था। छह साल से मामला जिला अदालत में विचाराधीन था। शुक्रवार को बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है।
अदालत ने कहा- फायरिंग के सबूत कहां हैं
गुरप्रीत सिंह के वकील मोहित कुमार और सुखदीप कुमार व रमन के वकील दीपक शर्मा ने अदालत में दलील रखी कि आरोपियों को मामले में झूठा फंसाया गया है। तीनों को पुलिस ने फायरिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने अपनी कहानी में कहा था जब आरोपियों को पकड़ने गए तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी। क्रॉस फायरिंग में पुलिस ने 16 गोलियां चलाई और आरोपियों ने पुलिस पर 6 राउंड फायर किए। अदालत ने कहा अगर मौके पर गोलियां चलीं हैं तो लगी कहां, उसके सबूत पेश करें। पुलिस सबूत पेश नहीं कर पाई। वकीलों ने अदालत में दलील रखी कि पुलिस ने मौके पर कोई वीडियो या फोटो नहीं करवाए। अगर फायरिंग हुई तो पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह नहीं रखा जो बता पाता कि फायरिंग हुई या नहीं। जिन गोलियों के चलने का पुलिस दावा कर रही है उसे पुलिस ने थाने में चलाया था। .32 एमएम की गन दो लोगों से रिकवरी में दिखाई लेकिन उसके फिंगर प्रिंट भी नहीं पेश किए गए। गोली चलाते समय गन पाउडर निकला लेकिन आरोपियों के कपड़ों के सैंपल तक नहीं लिए गए। अदालत ने कहा कि पुलिस अपनी कहानी कोर्ट में साबित नहीं कर पाई, जिस कारण तीनों को मामले से बरी किया जाता है।
यह है असल मामला
गुरप्रीत सिंह ने अदालत में 313 के बयान दर्ज करवाते समय कहा कि सह आरोपी सुखदीप कुमार शर्मा की प्रेमिका के कहने पर इंस्पेक्टर सतवंत सिंह ने उन पर झूठा मामला दर्ज कराया है। 27 मार्च 2019 को एलांते मॉल मोहाली में उसने सिक्योरिटी गार्ड के रूप में नौकरी शुरू की। वह गांव बल्लोमाजरा में रहने लगा। सह-आरोपी सुखदीप कुमार शर्मा बगल के कमरे में रहता था। जानकारी के अनुसार सुखदीप कुमार की प्रेमिका भी कई बार सह-आरोपी सुखदीप कुमार के साथ आती और रहती थी। कुछ समय बाद उनके बीच मतभेद हो गए। 28 मार्च 2019 को सह-आरोपी सुखदीप कुमार शर्मा की प्रेमिका इंस्पेक्टर सतवंत सिंह के साथ उस कमरे में पहुंची, जहां सुखदीप कुमार शर्मा था। इस दौरान युवती के कहने पर इंस्पेक्टर सतवंत सिंह ने सुखदीप कुमार से हाथापाई शुरू कर दी। जब उसने शोर सुना तो उसने सह-आरोपी सुखदीप कुमार को इंस्पेक्टर सतवंत सिंह से बचाने की कोशिश की। उस समय उन्हें नहीं पता था कि वह एक पुलिस कर्मचारी है, क्योंकि वह सादी वर्दी में था। इंस्पेक्टर सतवंत सिंह उन्हें पुलिस स्टेशन ले गया, जहां उन्होंने उन हथियारों से गोलियां चलाई जो पहले से ही पुलिस के पास थे। किसी भी कथित हथियार पर उसका कोई फिंगरप्रिंट नहीं है। इंस्पेक्टर सतवंत सिंह ने उन पर झूठा मामला दर्ज कर दिया। घटनास्थल पर कोई गोलीबारी नहीं हुई। इस मामले में पुलिस ने साथ देने पर रमन को भी नामजद किया था।